MP News: जिस उम्र में बच्चे खेलते हैं खिलौनों से, उस उम्र में मनवीत को मां की गोद में मिला पुलिस का ज्वाइनिंग लेटर

Rahul Goshwami

Manveet Child Constable Appointment: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क-  मध्य प्रदेश के उज्जैन से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया है। महज दो साल के मनवीत को पुलिस विभाग में बाल आरक्षक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी गई है। उसके पिता रणजीत सिंह डोडिया की ड्यूटी के दौरान सड़क हादसे में मौत हो गई थी। पिता के जाने के बाद परिवार के सामने बच्चों की परवरिश और भविष्य की चिंता थी। अब पुलिस विभाग के इस फैसले से परिवार को आर्थिक सहारा मिलने का रास्ता खुला है।मनवीत अभी इतना छोटा है कि वह नियुक्ति और पुलिस सेवा की जिम्मेदारियों को समझ भी नहीं सकता। वह अपनी मां की गोद में बैठकर नियुक्ति पत्र लेने पहुंचा। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने उसे दुलार भी किया। यह पल परिवार के लिए जहां भावुक करने वाला था, वहीं भविष्य की उम्मीद भी लेकर आया।

मनवीत अपनी मां ज्योति कुंवर के साथ उज्जैन के पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा था। यहां पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कर नियुक्ति पत्र सौंपा। इस दौरान एसपी ने नन्हे मनवीत को चॉकलेट खिलाकर स्नेह जताया।पिता की जगह परिवार को मिलने वाली यह मदद ऐसे समय में आई है, जब बच्चों की परवरिश और उनकी पढ़ाई की जिम्मेदारी मां पर है। नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने से परिवार को आगे के लिए आर्थिक संबल मिलने की उम्मीद है।

26 जनवरी को सड़क हादसे में हुई थी पिता की मौत
मनवीत के पिता रणजीत सिंह डोडिया मध्य प्रदेश पुलिस में आरक्षक के पद पर कार्यरत थे। उनकी तैनाती मंदसौर जिले में थी। जानकारी के मुताबिक, 26 जनवरी 2026 को सेवा के दौरान सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी।रणजीत सिंह के परिवार में पत्नी ज्योति कुंवर, दो बेटियां और दो साल का बेटा मनवीत है। पति की मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों को संभालने की चुनौती खड़ी हो गई। इसके बाद ज्योति कुंवर ने पुलिस विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था।
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मंदसौर में पद नहीं मिलने पर उज्जैन भेजा गया मामला
बताया गया है कि मंदसौर जिले में पद उपलब्ध नहीं होने के कारण नियुक्ति से जुड़ा मामला वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से उज्जैन पुलिस अधीक्षक कार्यालय भेजा गया। जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद मनवीत को बाल आरक्षक के पद पर नियुक्ति दी गई।अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य दिवंगत कर्मचारी के परिवार को कठिन समय में आर्थिक सहारा देना है। मनवीत के मामले में भी इस फैसले से परिवार को भविष्य की जरूरतें पूरी करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

18 साल की उम्र और दसवीं पास करने के बाद नियमित सेवा
मनवीत को फिलहाल पुलिस की नियमित ड्यूटी नहीं करनी होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निर्धारित नियमों के तहत 18 साल की उम्र पूरी करने और दसवीं कक्षा पास करने के बाद ही उसे नियमित पुलिस सेवा में शामिल किया जा सकेगा।तब तक परिवार को नियमों के अनुसार नव आरक्षक के वेतन का आधा हिस्सा दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे बच्चों की पढ़ाई, परवरिश और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, भुगतान की अवधि और शर्तों की पुष्टि संबंधित विभागीय आदेश से की जानी चाहिए।

प्रदेश में अपनी तरह का पहला मामला होने का दावा
पुलिस विभाग के मुताबिक, इतनी कम उम्र के बच्चे को बाल आरक्षक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने का यह मध्य प्रदेश का पहला मामला बताया जा रहा है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।मनवीत के लिए पिता की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती, लेकिन नियुक्ति से उसके परिवार को भविष्य के लिए आर्थिक सहारा जरूर मिल सकता है। अब परिवार की उम्मीद है कि बच्चों की पढ़ाई और परवरिश बेहतर तरीके से जारी रह सकेगी।

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