इंदौर। Nishaanebaz.com-Bhagirathpura Case: मध्य प्रदेश में एक बार फिर प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर सियासी पारा गर्माता हुआ नजर आ रहा है। इंदौर के बहुचर्चित भागीरथपुरा मामले के समय शहर में अपर आयुक्त के रूप में पदस्थ रहे रोहित सिसोनिया को कलेक्टर बनाए जाने के सरकार के फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इस निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए कांग्रेस पार्टी ने इसे पूरी तरह से अन्यायपूर्ण करार दिया है और इसके खिलाफ न्याय पाने के लिए माननीय उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) जाने का बड़ा ऐलान किया है।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने बेहद कड़ा रुख अपनाया और सरकार के इस प्रशासनिक निर्णय पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि रोहित सिसोनिया को पूर्व में भागीरथपुरा मामले के दौरान गंभीर रूप से दोषी पाया गया था, इसके बावजूद सरकार ने उन्हें एक मलाईदार और बेहद महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर पदस्थ कर दिया है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि इस तरह के निर्णय से प्रशासनिक व्यवस्था और जनता के बीच गलत संदेश जाता है।
चिंटू चौकसे ने अपना बयान जारी करते हुए आगे कहा कि यह फैसला सीधे तौर पर भागीरथपुरा के आम नागरिकों के साथ किया गया अन्याय है। जब जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर सरकार को उन सभी जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त वैधानिक कार्रवाई करनी चाहिए थी, तब सरकार की ओर से उन्हें कलेक्टर के रूप में प्रमोट कर जिम्मेदारी सौंपना सीधे तौर पर नागरिकों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचा रहा है।
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों का कहना है कि वे इस संवेदनशील मामले में चुप बैठने वाले नहीं हैं। जनता के अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर अब पार्टी विधिवत रूप से अदालत का दरवाजा खटखटाएगी और सरकार के इस विवादित तथा जनविरोधी फैसले के खिलाफ पुरजोर कानूनी लड़ाई लड़ेगी। इस ऐलान के बाद से प्रदेश की सियासत में प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर बहस और तेज हो गई है।
