CG News: रायपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्वेद परिषद के चुनाव को लेकर शासकीय और गैर-सरकारी चिकित्सकों के बीच विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर कुछ प्रत्याशियों और चिकित्सकों ने आपत्तियां दर्ज कराई हैं। शिकायतों के बाद मतगणना आगामी आदेश तक स्थगित किए जाने की बात सामने आई है। वहीं, शिकायतकर्ता प्रत्याशियों ने मौजूदा निर्वाचन प्रक्रिया को रद्द कर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है।
चुनाव प्रक्रिया को लेकर गैर-सरकारी चिकित्सकों की ओर से कई सवाल उठाए गए हैं। उनका आरोप है कि निर्वाचन प्रक्रिया में अपनाई जा रही कुछ व्यवस्थाओं से शासकीय चिकित्सकों को कथित तौर पर लाभ मिलने की स्थिति बन रही है। कुछ चिकित्सकों ने यह भी आशंका जताई है कि आयुर्वेद अधिकारी संघ से जुड़े शासकीय चिकित्सकों को फायदा पहुंचाने के लिए चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
शिकायतों के बाद मतगणना स्थगित
निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर प्रत्याशियों की ओर से शिकायतें और आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। इन्हीं शिकायतों के बाद मतगणना को अगले आदेश तक स्थगित किए जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायतकर्ता प्रत्याशियों का कहना है कि जब तक चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी आपत्तियों और शिकायतों का निष्पक्ष तरीके से निराकरण नहीं हो जाता, तब तक परिणाम जारी नहीं किया जाना चाहिए।
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प्रत्याशियों की ओर से अब मौजूदा चुनाव प्रक्रिया को रद्द कर नए सिरे से निर्वाचन कराने की मांग की गई है। उनका कहना है कि चुनाव में सभी पात्र चिकित्सकों और प्रत्याशियों को समान अवसर मिलना चाहिए तथा पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप और पारदर्शी तरीके से संचालित होनी चाहिए।
मंत्री कार्यालय के निर्देश और रजिस्ट्रार के पत्र का भी जिक्र
पूरे विवाद में मंत्री कार्यालय की ओर से दिए गए निर्देश और परिषद के रजिस्ट्रार द्वारा जारी पत्र का भी उल्लेख किया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन निर्देशों और पत्राचार के बावजूद निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर उनकी आपत्तियों का पूरी तरह समाधान नहीं हुआ है।
हालांकि, संबंधित निर्देशों का वास्तविक प्रभाव क्या रहा और निर्वाचन प्रक्रिया में उनका किस तरह पालन हुआ, इसे लेकर आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है। ऐसे में चिकित्सकों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
मतदाता सूची से लेकर नामांकन तक उठे सवाल
शिकायतकर्ता चिकित्सकों का कहना है कि किसी भी वैधानिक परिषद के चुनाव में मतदाता सूची, पात्रता, नामांकन, आपत्तियों के निराकरण, मतदान और मतगणना जैसी सभी प्रक्रियाओं में स्पष्ट नियम और समान व्यवस्था होनी चाहिए।
उनका कहना है कि यदि किसी प्रत्याशी या चिकित्सक ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है तो उसका निराकरण संबंधित नियमों और दस्तावेजों के आधार पर किया जाना चाहिए। साथ ही, निर्वाचन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों और निर्देशों को सभी पक्षों के सामने स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि चुनाव को लेकर किसी तरह का भ्रम या अविश्वास न रहे।
अब विभाग के अगले कदम पर नजर
आयुर्वेद परिषद के चुनाव को लेकर बढ़े विवाद के बीच अब संबंधित विभाग, मंत्री कार्यालय और निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों के अगले कदम पर नजर है। सबसे अहम सवाल यह है कि प्रत्याशियों की शिकायतों का किस तरह निराकरण किया जाता है और क्या मौजूदा निर्वाचन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा या चुनाव को लेकर नए सिरे से निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल मतगणना स्थगित होने और चुनाव रद्द कर नए सिरे से कराने की मांग के बाद परिषद का चुनाव विवादों में घिर गया है। चिकित्सकों की मांग है कि पूरी प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप पारदर्शी तरीके से संचालित किया जाए, ताकि सभी पात्र प्रत्याशियों और मतदाताओं का निर्वाचन प्रक्रिया पर भरोसा बना रहे।






