Bilaspur News: बिलासपुर। वर्ष 2006 की सूबेदार, प्लाटून कमांडर और उपनिरीक्षक भर्ती से जुड़े वरिष्ठता विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राहत नहीं दी। 30 सितंबर 2026 को जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्रीचंद्रशेखर की पीठ ने एलसी कोसले व अन्य की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के 23 जुलाई 2026 के फैसले को बरकरार रखा गया।
दरअसल, पुलिस मुख्यालय ने 18 सितंबर 2006 को सूबेदार, प्लाटून कमांडर और उपनिरीक्षक के 380 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। एलसी कोसले, रवि सिंह ठाकुर, विनोद तोंडे और सैयद अहसान अली का चयन 8 अप्रैल 2008 को जारी पहली मेरिट सूची में हुआ था। नियुक्ति के बाद इन अभ्यर्थियों ने प्रशिक्षण भी पूरा किया।
बाद में मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र-2 में आठ प्रश्नों और उनके मॉडल उत्तरों में त्रुटियां सामने आईं। इसके बाद पुलिस भर्ती बोर्ड ने संबंधित प्रश्न हटाकर उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराया और 27 जून 2009 को संशोधित मेरिट सूची जारी की।
संशोधित मेरिट सूची के बाद पहले की नियुक्तियां रद्द कर दी गईं और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 9 जुलाई 2013 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्मूल्यांकन को सही माना। हालांकि, तीन साल से अधिक सेवा कर चुके और धोखाधड़ी के आरोप से मुक्त अभ्यर्थियों को संशोधित सूची के आधार पर नई नियुक्ति मानते हुए वरिष्ठता में सबसे नीचे रखने का निर्देश दिया गया था। उन्हें पुरानी वरिष्ठता और बकाया वेतन का लाभ भी नहीं दिया गया।
वरिष्ठता सूची को लेकर दोबारा विवाद
याचिकाकर्ताओं ने बाद में वरिष्ठता सूची को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें 2013 के बाद नए नियुक्त कर्मचारियों के रूप में माना गया और 2008 से 2013 के बीच नियुक्त प्लाटून कमांडरों से नीचे रखा गया। उनका तर्क था कि इससे बाद में नियुक्त कुछ कर्मचारियों को कंपनी कमांडर के पद पर पदोन्नति मिल गई।
मामला पहले हाई कोर्ट की एकल पीठ और फिर खंडपीठ के सामने पहुंचा। 23 जुलाई 2026 को हाई कोर्ट की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि विभाग ने वरिष्ठता निर्धारित करने में सुप्रीम कोर्ट के 2013 के आदेश का पालन किया है।
Bilaspur News: इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की। 30 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के बाद 2008 से पुरानी वरिष्ठता का लाभ देने की मांग को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल समाप्त हो गया है।






