Wednesday, September 9, 2026
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CG News: छत्तीसगढ़ में पर्यटन का ऐसा प्लान! चित्रकोट से सिरपुर तक युवाओं की बदलेगी तस्वीर

Chhattisgarh Tourism Development: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- छत्तीसगढ़ अब सिर्फ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और ऐतिहासिक जगहों के लिए ही पहचान बनाने की दिशा में नहीं बढ़ रहा है, बल्कि पर्यटन को रोजगार, स्थानीय कमाई और छोटे कारोबार से जोड़ने की तैयारी भी तेज हो रही है। राज्य सरकार का जोर इस बात पर है कि बाहर से आने वाले पर्यटकों का खर्च सीधे स्थानीय लोगों तक पहुंचे।सरकार की योजना के तहत गांवों, जंगलों, पहाड़ों, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य पर्यटन को केवल घूमने तक सीमित न रखकर स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत हिस्सा बनाना है।

छत्तीसगढ़ की बड़ी ताकत उसके गांव, जंगल, पहाड़ और प्राकृतिक स्थल हैं। सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय परिवारों के लिए कमाई के नए रास्ते तैयार करने पर जोर दे रही है।छत्तीसगढ़ पर्यटन विकास की इस सोच में होमस्टे, स्थानीय भोजन, परिवहन, हस्तशिल्प और गाइड जैसी सेवाओं को बढ़ावा देने की बात कही गई है। यानी पर्यटक जब किसी गांव में पहुंचेगा तो उसके रहने और खाने से लेकर घूमने तक होने वाला खर्च कई स्थानीय परिवारों की आय का साधन बन सकता है।इससे गांवों से रोजगार के लिए बाहर जाने की जरूरत कम करने में भी मदद मिल सकती है।

महिलाएं संभाल रही हैं पर्यटन की जिम्मेदारी
पर्यटन से महिलाओं को जोड़ने की कोशिश का उदाहरण सूरजपुर में देखने को मिल रहा है। यहां ग्रामीण महिलाएं झील से जुड़ी पर्यटन गतिविधियों में हिस्सा ले रही हैं।महिलाएं बोटिंग, गाइड सेवा और स्थानीय सामान की बिक्री जैसे कामों से कमाई कर रही हैं। दी गई जानकारी के अनुसार कुछ महिलाएं इन गतिविधियों से रोजाना करीब 1,000 से 1,500 रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।छत्तीसगढ़ पर्यटन विकास में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से पर्यटन के साथ-साथ परिवारों की आय में भी सुधार की उम्मीद है।

चित्रकोट से मैनपाट तक बढ़ेगा दायरा
राज्य में पर्यटन के लिए कई ऐसे स्थान हैं जिनकी पहचान पहले से देशभर में है। बस्तर का चित्रकोट और तीरथगढ़, सरगुजा का मैनपाट, जशपुर की प्राकृतिक सुंदरता और सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं।चित्रकोट को बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। वहीं सिरपुर के लिए भी एक साथ कई सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।मैनपाट और जशपुर में भी पर्यटकों के लिए सुविधाएं बेहतर करने पर जोर है।

धार्मिक पर्यटन को भी मिलेगी रफ्तार
छत्तीसगढ़ में धार्मिक स्थलों को भी पर्यटन की नई योजनाओं से जोड़ने की तैयारी है। भोरमदेव क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार से 145 करोड़ 99 लाख रुपये की मंजूरी मिलने की जानकारी दी गई है।रतनपुर के महामाया मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों के विकास की योजनाएं भी आगे बढ़ाई जा रही हैं। इससे धार्मिक यात्रा के साथ स्थानीय दुकानदारों, होटल, वाहन चालकों और अन्य सेवा देने वालों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

अयोध्या और काशी तक पहुंच रहे श्रद्धालु
राज्य की श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना को भी धार्मिक पर्यटन से जोड़कर देखा जा रहा है। दी गई जानकारी के अनुसार आईआरसीटीसी की सहायता से अब तक 61 ट्रेनों का संचालन हुआ है और 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या और काशी की यात्रा कर चुके हैं।यह पहल लोगों को धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों से जोड़ने के साथ पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने में भी मदद कर सकती है।

फिल्मों की शूटिंग से भी खुलेंगे रोजगार के रास्ते
छत्तीसगढ़ अब फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी संभावनाएं तलाश रहा है। राज्य में फिल्म सिटी के लिए 203 करोड़ 53 लाख रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलने की जानकारी सामने आई है।कन्वेंशन सेंटर और फिल्म सिटी के विकास की अनुमानित लागत करीब 350 करोड़ रुपये बताई गई है।फिल्म निर्माण बढ़ने से केवल कलाकारों को ही काम नहीं मिलेगा। होटल, वाहन, भोजन, तकनीकी काम, मेकअप, सेट तैयार करने और सुरक्षा जैसी सेवाओं में भी स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बन सकते हैं।

ऑनलाइन सुविधाओं से बदल रहा पर्यटन
आज पर्यटक किसी जगह जाने से पहले मोबाइल पर होटल, रास्ते, घूमने की जगह और दूसरी सुविधाओं की जानकारी जुटाता है। इसी को देखते हुए पर्यटन विभाग वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए पर्यटन से जुड़ी जानकारी और ऑनलाइन बुकिंग को आसान बनाने पर काम कर रहा है।सरकार के अनुसार पिछले दो वर्षों में ऑनलाइन बुकिंग से करीब 6 करोड़ 48 लाख रुपये और पर्यटन इकाइयों से करीब 31 करोड़ 75 लाख रुपये का राजस्व मिला है।यह आंकड़ा बताता है कि पर्यटन व्यवस्था में ऑनलाइन सेवाओं की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।

युवाओं के लिए बढ़ेंगे काम के मौके
पर्यटन बढ़ने के साथ कई तरह के छोटे और बड़े काम भी पैदा होते हैं। टूर गाइड, होटल, यात्रा सेवा, वाहन, भोजन, फोटोग्राफी और डिजिटल सामग्री जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए अवसर बन सकते हैं।राज्य में 390 से अधिक टूर ऑपरेटर और ट्रैवल एजेंट तथा 26 होटल पंजीकृत होने की जानकारी दी गई है। सरकार का लक्ष्य करीब 500 स्थानीय युवाओं को पर्यटन से जुड़े कामों का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ना है।

लोककला को मिलेगा नया बाजार
छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति भी पर्यटन का बड़ा हिस्सा बन सकती है। पंडवानी, भरथरी, ददरिया, जसगीत, करमा, पंथी और अन्य लोककलाओं को पर्यटन से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।रंगतरंग, पावस प्रसंग, रंगपरव और लोकरंग पर्व जैसे आयोजनों के जरिए कलाकारों को मंच देने की योजना है। इससे बाहर से आने वाले पर्यटकों को राज्य की स्थानीय संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
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कलाकारों के लिए आर्थिक मदद
पर्यटन और संस्कृति को साथ बढ़ाने के लिए कलाकारों को आर्थिक सहायता देने वाली योजनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।दी गई जानकारी के अनुसार पिछले ढाई साल में 70 कलाकारों को करीब 30 लाख 3 हजार रुपये की चिकित्सा सहायता दी गई। लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना के तहत 87 कलाकारों को करीब 19 लाख 8 हजार रुपये का लाभ मिला।इसके अलावा 407 आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों को करीब 82 लाख 12 हजार रुपये की पेंशन दिए जाने की जानकारी है।

पुरानी धरोहरों को भी बचाने की तैयारी
पर्यटन बढ़ाने के लिए नए स्थल तैयार करने के साथ पुरानी धरोहरों की सुरक्षा भी जरूरी है। राज्य में 63 संरक्षित स्मारकों के संरक्षण की जानकारी दी गई है।इसके अलावा 12 स्मारकों में संरक्षण, सुधार और पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय को बेहतर बनाने और नई गैलरी तैयार करने का प्रस्ताव भी इसी योजना का हिस्सा बताया गया है।

2028 तक नई पहचान बनाने का लक्ष्य
राज्य सरकार ने वर्ष 2028 तक छत्तीसगढ़ को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत अगले पांच वर्षों में हर साल 100 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान की दिशा में काम करने की बात कही गई है।प्रस्तावित पर्यटन नीति-2026 में स्थानीय लोगों की भागीदारी, निजी निवेश और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पर्यटन विकसित करने पर जोर है।छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की 18 पर्यटन संपत्तियों को निजी भागीदारी के जरिए विकसित करने की योजना भी बताई गई है। सरकार के अनुसार इससे करीब 500 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित हो सकता है और प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से 500 से 1,000 रोजगार के अवसर बन सकते हैं।

पर्यटन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने की कोशिश
छत्तीसगढ़ में पर्यटन को जिस तरह रोजगार और स्थानीय कारोबार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, उसका असली असर गांवों और छोटे कारोबारियों तक पहुंचने पर दिखाई देगा।अगर पर्यटक स्थानीय होटल में रुकता है, गांव का खाना खाता है, स्थानीय सामान खरीदता है, गाइड लेता है और स्थानीय वाहन से घूमता है तो उसकी यात्रा से होने वाली कमाई कई परिवारों तक पहुंच सकती है।यही वजह है कि छत्तीसगढ़ पर्यटन विकास अब केवल नए पर्यटन स्थल बनाने की योजना नहीं रह गया है। इसे गांवों की आय, महिलाओं के रोजगार, युवाओं के काम, कलाकारों के सम्मान और स्थानीय कारोबार को बढ़ाने से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।चित्रकोट की प्राकृतिक सुंदरता, मैनपाट की पहाड़ियां, सिरपुर की विरासत, बस्तर की संस्कृति और धार्मिक स्थलों को एक साथ बढ़ावा मिलने से छत्तीसगढ़ पर्यटन के नक्शे पर अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है।

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