CG News: IPS रतनलाल डांगी केस में बड़ा मोड़! हाईकोर्ट ने शासन से मांगा जवाब, नहीं तो…

Rahul Goshwami

IPS Ratanlal Dangi Case: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- छत्तीसगढ़ के निलंबित IPS अधिकारी रतनलाल डांगी से जुड़े मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने राज्य शासन के रवैये पर सख्ती दिखाई है। मामला एक महिला योग टीचर की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अब अदालत ने शिकायत पर हुई कार्रवाई की पूरी जानकारी शासन से मांगी है।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट मामला अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने 2 सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान राज्य शासन को एक सप्ताह का अंतिम समय दिया। अदालत ने कहा है कि तय समय में जानकारी नहीं दी गई तो अगली सुनवाई में संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ सकता है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट मामला उस शिकायत से जुड़ा है, जिस पर पहले ही अदालत शासन से कार्रवाई की जानकारी मांग चुकी थी। 12 अगस्त 2026 के आदेश के तहत यह जानकारी अदालत में पेश की जानी थी, लेकिन शासन की ओर से अब तक ऐसा नहीं हो सका।इसके बाद हाईकोर्ट की सख्ती सामने आई है। अदालत ने शासन को अब एक सप्ताह का आखिरी मौका दिया है। शिकायत पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं, इसकी लिखित जानकारी शपथ पत्र के साथ अदालत में देने के निर्देश दिए गए हैं।

जवाब नहीं आया तो अधिकारी को कोर्ट में होना होगा पेश
हाईकोर्ट की सख्ती का सबसे अहम हिस्सा अदालत की चेतावनी है। कोर्ट ने साफ किया है कि अगर तय समय में शिकायत पर की गई कार्रवाई की जानकारी नहीं दी जाती है, तो संबंधित अधिकारी को 29 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ सकता है।यानी अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट मामला सिर्फ शिकायत और जांच तक सीमित नहीं रहा है। अदालत की नजर इस बात पर भी है कि शासन ने शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई की और उसकी जानकारी समय पर कोर्ट के सामने क्यों नहीं रखी गई।

महिला योग टीचर ने लगाए गंभीर आरोप
IPS रतनलाल डांगी केस की शुरुआत बिलासपुर की एक महिला योग टीचर की शिकायत से हुई। महिला ने आरोप लगाया है कि ऑनलाइन योग क्लास के दौरान उनके साथ अश्लील बातचीत की गई।शिकायत में महिला ने यह भी आरोप लगाया कि वीडियो कॉल के दौरान अधिकारी ने उनके सामने आपत्तिजनक व्यवहार किया। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि उनकी बात नहीं मानने पर उनके सब इंस्पेक्टर पति को झूठे आपराधिक मामले में फंसाने और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में ट्रांसफर कराने की धमकी दी गई।यहां यह साफ करना जरूरी है कि ये सभी बातें शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि या फैसला अदालत की प्रक्रिया के बाद ही माना जाएगा।
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अक्टूबर 2025 में DGP को दी थी शिकायत
IPS रतनलाल डांगी केस में शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने 15 अक्टूबर 2025 को सबूतों के साथ तत्कालीन DGP के पास शिकायत दर्ज कराई थी।इसके बाद मामले की जांच के लिए तत्कालीन IG आनंद छाबड़ा और तत्कालीन DIG मिलना कुर्रे को जांच अधिकारी बनाया गया था। शिकायतकर्ता ने बाद में जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए।महिला का आरोप है कि दोनों जांच अधिकारी मामले में IPS अधिकारी को बचाने का प्रयास कर रहे थे। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच और अदालत की आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगी।

निष्पक्ष जांच के लिए वरिष्ठ महिला IAS की मांग
हाईकोर्ट की सख्ती के बीच याचिकाकर्ता ने अदालत से मामले की जांच किसी वरिष्ठ महिला IAS अधिकारी से कराने की मांग की है।उनका कहना है कि मौजूदा जांच प्रक्रिया पर उन्हें भरोसा नहीं है। इसी मांग को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।अब अदालत के सामने यह भी महत्वपूर्ण है कि शिकायत पर हुई जांच और कार्रवाई की स्थिति क्या है और शासन इस बारे में कोर्ट को क्या जानकारी देता है।

मार्च में निलंबित किए गए थे IPS रतनलाल डांगी
IPS रतनलाल डांगी केस में उपलब्ध जानकारी के अनुसार अधिकारी को मार्च 2026 में निलंबित किया गया था। इसके बाद शिकायत और जांच से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ी।अब हाईकोर्ट ने शासन को एक सप्ताह की अंतिम मोहलत दी है। इससे मामले में अगली कार्रवाई को लेकर ध्यान 29 सितंबर की सुनवाई पर टिक गया है।

अब 29 सितंबर की सुनवाई पर सबकी नजर
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट मामला अभी किसी अंतिम फैसले तक नहीं पहुंचा है। अदालत ने फिलहाल शासन से शिकायत पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है।अब देखना होगा कि राज्य शासन एक सप्ताह के भीतर शपथ पत्र के साथ पूरी जानकारी अदालत में पेश करता है या नहीं। अगर जानकारी नहीं दी जाती है, तो 29 सितंबर की सुनवाई में संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत मौजूदगी को लेकर कोर्ट का अगला कदम महत्वपूर्ण होगा।याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू ने मामले में पैरवी की है। फिलहाल इस मामले में आगे होने वाली सुनवाई और जांच की दिशा पर सभी की नजर बनी हुई है।

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