Raipur Bank Scam: रायपुर। बैंक खातों और लॉकर को लोग अपनी जमा पूंजी और कीमती सामान रखने के लिए सबसे सुरक्षित मानते हैं। लेकिन रायपुर में पिछले करीब 20 साल में बैंकों से चोरी, गबन और ठगी के कई बड़े मामले सामने आए हैं। एक दर्जन से ज्यादा बैंकों से जुड़े इन मामलों में 70 करोड़ रुपए से अधिक की रकम फंसी है।
कहीं खातों से करोड़ों रुपए निकाल लिए गए तो कहीं बैंक लॉकर से लाखों रुपए के जेवर गायब हो गए। कई मामलों में एफआईआर दर्ज होने और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी पीड़ितों को उनका पैसा या जेवर वापस नहीं मिल सके हैं।
हाल ही में एक्सिस बैंक में 14.4 लाख रुपए की एफडी से जुड़ा मामला सामने आया है। फाफाडीह निवासी सुषमा कुमार का जेल रोड स्थित एक्सिस बैंक में खाता है। आरोप है कि बैंक के असिस्टेंट मैनेजर कुलदीप ने उनके नाम से फर्जी ई-मेल आईडी बनाई और खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर बदल दिया।
इसके बाद नए मोबाइल नंबर से मोबाइल बैंकिंग शुरू कर सुषमा की 14.4 लाख रुपए से ज्यादा की एफडी समय से पहले बंद कर दी गई। मामले में गंज पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। पीड़िता को अब तक रकम वापस नहीं मिली है। पुलिस फरार आरोपी अभिषेक कुमार की तलाश में ग्वालियर भी गई है।
5 साल बाद भी नहीं मिले 50 लाख के जेवर
आजाद चौक स्थित सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के लॉकर से रिटायर्ड एएसपी मुकेश खरे के करीब 50 लाख रुपए के जेवर गायब हो गए थे। दिसंबर 2021 में जब वे लॉकर खोलने पहुंचे तो उसमें जेवर नहीं मिले। करीब पांच साल बीतने के बाद भी उन्हें अपने जेवर वापस नहीं मिले हैं।
बैंक बंद होने के बाद भी नहीं मिली जमा रकम
सिलतरा निवासी रानी यादव ने आईडीबीआई बैंक में अपनी जीवनभर की कमाई के 3.40 लाख रुपए जमा किए थे। इसी तरह किरण वर्मा के 7 लाख रुपए और नरेंद्र वर्मा व उनकी पत्नी मनीषा वर्मा के करीब 40 लाख रुपए बैंक में जमा थे। बाद में बैंक में ताला लग गया। पीड़ितों को अब तक अपनी रकम वापस नहीं मिली है।
रायपुर के चर्चित बैंक घोटाले और ठगी के मामले
इंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक घोटाला
साल 2006 में टैगोर नगर स्थित इंदिरा प्रियदर्शिनी महिला नागरिक सहकारी बैंक का घोटाला सामने आया था। इस मामले में करीब 22 हजार खाताधारकों की रकम फंस गई थी। करीब 22 करोड़ रुपए की गड़बड़ी का आरोप लगा था। तत्कालीन बैंक मैनेजर उमेश सिन्हा समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। करीब 20 साल बाद अब मामले की सुनवाई अंतिम चरण में है और जांच अधिकारियों की गवाही चल रही है।
आईडीबीआई बैंक में 40 लाख का गबन
आईडीबीआई की सिलतरा-बरौदा शाखा के कर्मचारी राजा खुटे पर आरोप है कि उसने पति-पत्नी से एफडी कराने के नाम पर ब्लैंक चेक लिए। बाद में फर्जी एफडी की रसीद देकर उनका भरोसा जीता। आरोप है कि जून 2023 से नवंबर 2025 के बीच करीब 40 लाख रुपए अपने और साथियों के खातों में ट्रांसफर कर दिए।
यूनियन बैंक में 5.59 करोड़ की गड़बड़ी
जून 2022 में राजेंद्र नगर स्थित यूनियन बैंक में 5.59 करोड़ रुपए के गबन का मामला सामने आया था। आरोप है कि कैशियर किशन बघेल ने रिकॉर्ड में 10 रुपए के सिक्कों की फर्जी एंट्री कर यह रकम निकाली और रिश्तेदारों के सात खातों में ट्रांसफर कर दी। बैंक को अब तक यह रकम वापस नहीं मिली है।
एक्सिस बैंक से 16.40 करोड़ रुपए की ठगी
मार्च 2022 में डूंडा स्थित एक्सिस बैंक में मंडी बोर्ड की सरकारी रकम से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया था। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज और बैंक खाते तैयार कर करीब 16.40 करोड़ रुपए 26 खातों में ट्रांसफर कर दिए। मामले में बैंक के दो मैनेजरों समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
फर्जी दस्तावेज से 25 होम लोन
2019 में खमतराई क्षेत्र के यूनियन बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक में करीब 10 करोड़ रुपए की ठगी का मामला सामने आया था। आरोपियों ने फर्जी रजिस्ट्री, जमीन के दस्तावेज और रेलवे कर्मचारियों के कागजात का इस्तेमाल कर करीब 25 होम लोन हासिल किए थे। पुलिस ने 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
SBI लॉकर से भी गायब हुए जेवर
2015 में एमजी रोड स्थित SBI शाखा के लॉकर से लाखों रुपए के जेवर गायब होने का मामला सामने आया था। करीब 14 दंपतियों के लॉकर से जेवर गायब होने की शिकायत हुई थी। इन जेवरों का अब तक पता नहीं चल पाया है।
Raipur Bank Scam: 20 साल पुराने बैंक घोटाले की सुनवाई जारी
Raipur Bank Scam: इंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक घोटाले की सुनवाई अब अंतिम चरण में है। करीब 20 साल पुराने इस मामले में जांच अधिकारियों की गवाही दर्ज की जा रही है। वहीं, हाल में सामने आए एक्सिस बैंक मामले में पुलिस फरार आरोपियों की तलाश कर रही है।
Raipur Bank Scam: इन घटनाओं से साफ है कि बैंक खाते और लॉकर को सुरक्षित मानने के बावजूद लापरवाही, फर्जी दस्तावेज और अंदरूनी मिलीभगत के चलते लोगों की जमा पूंजी और कीमती सामान जोखिम में पड़ सकते हैं। कई मामलों में वर्षों बाद भी पीड़ितों को उनका पैसा या जेवर वापस नहीं मिल पाया है।





