Sunday, August 30, 2026
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Drip Irrigation Subsidy Online Registration Process: खेतों की बूंद-बूंद सिंचाई से बढ़ेगा मुनाफा, खाद व मजदूरी के खर्च में कटौती के साथ पाएं सरकारी योजना का लाभ

नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-Drip Irrigation System Subsidy: खेती-किसानी में लगातार बढ़ती पानी की किल्लत और बिजली का भारी बिल किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इस समस्या से निपटने और सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए पारंपरिक तरीकों के बजाय ड्रिप इरिगेशन यानी टपक सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह तकनीक पौधों की जड़ों तक बूंद-बूंद पानी और आवश्यक पोषक तत्व सीधे पहुंचाती है, जिससे पानी की बर्बादी लगभग शून्य हो जाती है। किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम की शुरुआती लागत से राहत देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना तथा राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत भारी सब्सिडी प्रदान कर रही हैं।

सरकारी नियमानुसार सब्सिडी को किसानों की भूमि और श्रेणी के आधार पर दो वर्गों में विभाजित किया गया है। 2 हेक्टेयर यानी करीब 5 एकड़ तक की जमीन वाले छोटे और सीमांत किसानों को कुल लागत पर 55 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है, जिसका अर्थ है कि आधा खर्च सरकार वहन करेगी और किसान को केवल 45 प्रतिशत राशि लगानी होगी। वहीं, 2 हेक्टेयर से अधिक जमीन वाले या सामान्य वर्ग के किसानों को 45 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, महिला किसानों, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और बुंदेलखंड जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए राज्य सरकारें अतिरिक्त टॉप-अप सब्सिडी जोड़कर इसे 70 से 80 प्रतिशत तक पहुंचा देती हैं।

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ड्रिप इरिगेशन प्रणाली सिर्फ जल संरक्षण का जरिया नहीं है, बल्कि यह किसानों के कुल उत्पादन और मुनाफे को बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम है। जहां खुले पानी से सिंचाई करने पर 50 से 60 प्रतिशत तक पानी वाष्पीकरण और बहने से व्यर्थ हो जाता है, वहीं ड्रिप सिस्टम 70 प्रतिशत तक पानी की सीधी बचत करता है। इसमें फर्टिगेशन की सुविधा मिलती है, जिससे घुलनशील खाद को सीधे पाइपलाइन के माध्यम से जड़ों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे खेत में संतुलित नमी बनी रहती है, खरपतवार व फफूंद जनित बीमारियां कम होती हैं, और कीटनाशक तथा मजदूरी की लागत में भारी कमी आती है। सटीक सिंचाई से पैदावार की गुणवत्ता सुधरती है और उत्पादन में 30 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है।

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इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है, वे अपने राज्य के कृषि या उद्यानिकी विभाग के पोर्टल (जैसे ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल) या निकटतम सीएससी सेंटर से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया के लिए आधार कार्ड, आधार से लिंक मोबाइल नंबर, बैंक पासबुक, जमीन के कागजात (खसरा-खतौनी या बी-1 नकल), बिजली कनेक्शन का बिल, एग्री-स्टैक फार्मर आईडी और आरक्षित वर्ग के लिए जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। पोर्टल पर पंजीकरण के बाद विभाग द्वारा स्वीकृति मिलने पर अधिकृत वेंडर खेत में सिस्टम इंस्टॉल करता है, जिसके बाद विभागीय सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) पूरा होते ही सब्सिडी की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेज दी जाती है।

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