Saturday, August 29, 2026
Home Chhattisgarh Raipur Family Court Verdict: जूडियो में कार्यरत मां के संघर्षों को कोर्ट...

Raipur Family Court Verdict: जूडियो में कार्यरत मां के संघर्षों को कोर्ट ने सराहा, 10 वर्षीय पुत्री और 7 वर्षीय पुत्र की कस्टडी पर बड़ा निर्णय

रायपुर। Nishaanebaz.com-Raipur Family Court Verdict: रायपुर के चतुर्थ अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय विवेक कुमार तिवारी की अदालत ने बच्चों की कस्टडी (संरक्षकता) से जुड़े एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त पेटी ऑफिसर (हवलदार) भूपेंद्र सिंह चौहान द्वारा अपने दोनों मासूम बच्चों की अभिरक्षा प्राप्त करने के लिए दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बच्चों का सर्वोत्तम हित, मानसिक विकास और कल्याण उनकी मां अपूर्वा चौहान की अभिरक्षा (कस्टडी) में ही पूरी तरह सुरक्षित है।

मामले के विवरण के अनुसार, वादी भूपेंद्र सिंह चौहान ने ‘हिन्दू अल्पवयस्कता और संरक्षकता अधिनियम, 1956’ की धारा 25 के तहत अपनी 10 वर्षीय पुत्री समृद्धि चौहान और 7 वर्षीय पुत्र सुलेख सिंह चौहान की कस्टडी पाने के लिए परिवार न्यायालय में परिवाद (CMC No. 207/2024) दायर किया था। वादी का तर्क था कि नौसेना से सेवानिवृत्त होने के कारण उनके पास पर्याप्त समय है और वे आर्थिक रूप से बच्चों का बेहतर पालन-पोषण कर सकते हैं, जबकि उनकी पत्नी प्राइवेट कंपनी (जूडियो) में नौकरी करने के कारण बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पाती हैं।

Read More : Raisen Road Accident: रायसेन में दो कारों की आमने-सामने भिड़ंत, एक परिवार के पांच लोग घायल; इनोवा चालक फरार

मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादिनी पत्नी अपूर्वा चौहान की ओर से पैरवी करते हुए वकील ने पति के तर्कों का खंडन किया और प्रताड़ना का हवाला दिया। मां ने अदालत के समक्ष स्पष्ट किया कि वे एक निजी फर्म में नौकरी कर पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ दोनों बच्चों की देखभाल, भरण-पोषण और उत्कृष्ट शिक्षा का खर्च वहन कर रही हैं। बच्चों को किसी भी तरह की असुविधा नहीं होने दी जा रही है।

Read More : Bhilai Steel Plant Scam: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लिया संज्ञान, दिल्ली पहुंचे विधायक रिकेश सेन SAIL, CBI और CISF प्रमुखों से करेंगे मुलाकात

न्यायालय ने अपने फैसले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के कई ऐतिहासिक दृष्टांतों का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि बच्चों की कस्टडी से जुड़े मामलों में माता-पिता के निजी अधिकारों और दावों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बच्चे का सर्वोत्तम हित, सर्वांगीण विकास और खुशहाली होती है। जज विवेक कुमार तिवारी की अदालत ने माना कि दोनों बच्चे लंबे समय से अपनी मां के साथ रह रहे हैं और मां उनका ख्याल बहुत अच्छी तरह रख रही है। इसके अतिरिक्त, 10 वर्षीय पुत्री की आयु को देखते हुए उसे इस पड़ाव पर मां के आत्मीय सान्निध्य की सबसे ज्यादा आवश्यकता है।

Read More : Khandwa Railway Station: खंडवा रेलवे स्टेशन पर रेलवे मजिस्ट्रेट का औचक निरीक्षण, दो घंटे चली चेकिंग; अनियमितताओं पर कटे चालान

अदालत ने मां के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पिता भूपेंद्र सिंह चौहान के पितृत्व अधिकारों का सम्मान करते हुए उन्हें मिलने का अधिकार (Visiting Rights) प्रदान किया है। कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि पिता प्रत्येक रविवार को सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे के बीच जाकर अपने बच्चों से मिल सकते हैं और उनके साथ समय बिता सकते हैं। अदालत ने मां अपूर्वा चौहान को निर्देशित किया है कि पिता के मिलने के दौरान वे किसी प्रकार का व्यवधान या बाधा उत्पन्न न करें। इस मामले में वादी की ओर से अधिवक्ता सत्येंद्र सिंह और प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता विकास गुप्ता ने पक्ष रखा।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here