Raipur Family Court Verdict: जूडियो में कार्यरत मां के संघर्षों को कोर्ट ने सराहा, 10 वर्षीय पुत्री और 7 वर्षीय पुत्र की कस्टडी पर बड़ा निर्णय

VIKASH KHALKHO

रायपुर। Nishaanebaz.com-Raipur Family Court Verdict: रायपुर के चतुर्थ अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय विवेक कुमार तिवारी की अदालत ने बच्चों की कस्टडी (संरक्षकता) से जुड़े एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त पेटी ऑफिसर (हवलदार) भूपेंद्र सिंह चौहान द्वारा अपने दोनों मासूम बच्चों की अभिरक्षा प्राप्त करने के लिए दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बच्चों का सर्वोत्तम हित, मानसिक विकास और कल्याण उनकी मां अपूर्वा चौहान की अभिरक्षा (कस्टडी) में ही पूरी तरह सुरक्षित है।

मामले के विवरण के अनुसार, वादी भूपेंद्र सिंह चौहान ने ‘हिन्दू अल्पवयस्कता और संरक्षकता अधिनियम, 1956’ की धारा 25 के तहत अपनी 10 वर्षीय पुत्री समृद्धि चौहान और 7 वर्षीय पुत्र सुलेख सिंह चौहान की कस्टडी पाने के लिए परिवार न्यायालय में परिवाद (CMC No. 207/2024) दायर किया था। वादी का तर्क था कि नौसेना से सेवानिवृत्त होने के कारण उनके पास पर्याप्त समय है और वे आर्थिक रूप से बच्चों का बेहतर पालन-पोषण कर सकते हैं, जबकि उनकी पत्नी प्राइवेट कंपनी (जूडियो) में नौकरी करने के कारण बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पाती हैं।

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मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादिनी पत्नी अपूर्वा चौहान की ओर से पैरवी करते हुए वकील ने पति के तर्कों का खंडन किया और प्रताड़ना का हवाला दिया। मां ने अदालत के समक्ष स्पष्ट किया कि वे एक निजी फर्म में नौकरी कर पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ दोनों बच्चों की देखभाल, भरण-पोषण और उत्कृष्ट शिक्षा का खर्च वहन कर रही हैं। बच्चों को किसी भी तरह की असुविधा नहीं होने दी जा रही है।

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न्यायालय ने अपने फैसले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के कई ऐतिहासिक दृष्टांतों का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि बच्चों की कस्टडी से जुड़े मामलों में माता-पिता के निजी अधिकारों और दावों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बच्चे का सर्वोत्तम हित, सर्वांगीण विकास और खुशहाली होती है। जज विवेक कुमार तिवारी की अदालत ने माना कि दोनों बच्चे लंबे समय से अपनी मां के साथ रह रहे हैं और मां उनका ख्याल बहुत अच्छी तरह रख रही है। इसके अतिरिक्त, 10 वर्षीय पुत्री की आयु को देखते हुए उसे इस पड़ाव पर मां के आत्मीय सान्निध्य की सबसे ज्यादा आवश्यकता है।

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अदालत ने मां के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पिता भूपेंद्र सिंह चौहान के पितृत्व अधिकारों का सम्मान करते हुए उन्हें मिलने का अधिकार (Visiting Rights) प्रदान किया है। कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि पिता प्रत्येक रविवार को सुबह 9:00 बजे से शाम 5:00 बजे के बीच जाकर अपने बच्चों से मिल सकते हैं और उनके साथ समय बिता सकते हैं। अदालत ने मां अपूर्वा चौहान को निर्देशित किया है कि पिता के मिलने के दौरान वे किसी प्रकार का व्यवधान या बाधा उत्पन्न न करें। इस मामले में वादी की ओर से अधिवक्ता सत्येंद्र सिंह और प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता विकास गुप्ता ने पक्ष रखा।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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