Sukma Girls Potakabin Students Sick: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क– छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पोलमपल्ली स्थित बालिका पोटाकेबिन में पिछले दो दिनों में 47 छात्राओं के अचानक बीमार पड़ने से हड़कंप मच गया। छात्राओं को बुखार, उल्टी और दस्त की शिकायत के बाद उपचार के लिए दोरनापाल स्वास्थ्य केंद्र और अस्पताल ले जाया गया। इनमें से कुछ छात्राएं उपचार के बाद स्वस्थ होकर वापस पोटाकेबिन लौट चुकी हैं, जबकि 35 छात्राओं का दोरनापाल अस्पताल में इलाज जारी है।शनिवार सुबह भी बीमार छात्राओं को तीन अलग-अलग चरणों में अस्पताल लाया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पहले 14, फिर 15 और बाद में 6 छात्राओं को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। एक साथ बड़ी संख्या में छात्राओं के बीमार होने से पोटाकेबिन की भोजन, पानी और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार को छात्राओं ने तीनों समय भोजन में कुमड़े की सब्जी खाई थी। इसके बाद कुछ छात्राओं की तबीयत बिगड़ने लगी। हालांकि, छात्राओं के बीमार होने की वजह फिलहाल पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।भोजन के कारण बीमारी फैलने की आशंका के बीच खाद्य सामग्री और पानी की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। इसके साथ ही पोटाकेबिन परिसर में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बीमारी का वास्तविक कारण स्वास्थ्य विभाग की जांच और सैंपल रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
एक छात्रा को सुकमा जिला अस्पताल किया रेफर
बीमार छात्राओं में सोड़ी लक्ष्मी की तबीयत ज्यादा खराब होने पर उसे दोरनापाल से सुकमा जिला अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में उसका उपचार जारी है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की ओर से छात्राओं की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और फिलहाल स्वास्थ्य में सुधार की जानकारी सामने आई है।कोंटा ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. दीपेश चंद्राकर ने बताया कि सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं और उन्हें आवश्यक दवाएं दी गई हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम पोटाकेबिन पहुंचकर स्थिति की निगरानी कर रही है।
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560 छात्राओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
पोलमपल्ली बालिका पोटाकेबिन में करीब 560 छात्राएं अध्ययनरत हैं। ऐसे में दो दिनों के भीतर 47 छात्राओं के बीमार होने की घटना ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।आवासीय विद्यालय में बड़ी संख्या में छात्राओं के रहने के कारण भोजन की गुणवत्ता, पेयजल की शुद्धता, रसोईघर की सफाई और परिसर की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। जिला शिक्षा विभाग की ओर से आवासीय आश्रमों में स्वच्छता और पीने के पानी को लेकर समय-समय पर निर्देश भी दिए जाते हैं।
दूषित पानी या संक्रमण की भी हो सकती है वजह
छात्राओं के बीमार पड़ने को फिलहाल केवल भोजन से जोड़ना जल्दबाजी होगी। दूषित भोजन के अलावा दूषित पानी, वायरल संक्रमण या किसी अन्य कारण से भी एक साथ कई छात्राएं बीमार हो सकती हैं।ऐसे में भोजन और पानी के नमूने लेकर उनकी जांच कराना बेहद महत्वपूर्ण होगा। साथ ही पोटाकेबिन की रसोई, खाद्य सामग्री के रखरखाव और स्वच्छता व्यवस्था का निरीक्षण भी जरूरी है। जांच रिपोर्ट से ही यह पता चल पाएगा कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं के बीमार होने के पीछे वास्तविक कारण क्या था।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संभाला मोर्चा
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम पोलमपल्ली बालिका पोटाकेबिन पहुंची। टीम ने छात्राओं के स्वास्थ्य की जांच की और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराईं। बीमार छात्राओं को जरूरत के अनुसार अस्पताल भेजा गया।फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में छात्राओं का उपचार चल रहा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही बीमारी के स्रोत और पोटाकेबिन की व्यवस्थाओं से जुड़े सवालों पर स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी।





