Thursday, August 27, 2026
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CG High Court Intercaste Marriage FIR Quashed: केवल शादी न होना शुरुआत से धोखाधड़ी का प्रमाण नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रद्द की दुष्कर्म की FIR

Chhattisgarh High Court
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कानूनी डेस्क [Nishanebaaz News]। CG High Court Intercaste Marriage FIR Quashed के तहत छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के आरोप से जुड़े एक मामले में अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल बाद में शादी नहीं हो पाने के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आरोपी ने शुरुआत से ही झूठा वादा किया था या उसकी मंशा धोखाधड़ी करने की थी। इस आधार पर कोर्ट ने कटघोरा थाने में दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को पूरी तरह रद्द कर दिया है।

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मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने दिया महत्वपूर्ण फैसला

यह मील का पत्थर फैसला मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही निवासी राहुल कुमार साहू की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया।

  • मामले की पृष्ठभूमि: शिकायतकर्ता महिला और आरोपी राहुल की मुलाकात विभागीय बैठकों के दौरान हुई थी, जहाँ दोनों में नजदीकियां बढ़ीं।

  • विवाद की वजह: राहुल ने शादी का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में अंतरजातीय विवाह होने के कारण परिवार के भारी विरोध के चलते शादी में अड़चन आई। इसके बाद कटघोरा थाने में मामला दर्ज कराया गया और पुलिस ने जांच के बाद अदालत में चार्जशीट पेश कर दी थी।

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विरोध के बाद भी हुई शादी, हाईकोर्ट ने देखा बदला घटनाक्रम

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के समक्ष एक बेहद महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। अदालत को बताया गया कि तमाम सामाजिक व पारिवारिक विरोधों के बावजूद आरोपी राहुल ने बाद में शिकायतकर्ता महिला से औपचारिक रूप से विवाह कर लिया है।

महिला ने भी हाईकोर्ट के सामने बयान देते हुए कहा कि वह अब अपने पति के खिलाफ कोई भी आपराधिक कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाना चाहती है।

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“शुरुआती नीयत साबित करना अनिवार्य” – हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

खंडपीठ ने मामले का वैधानिक मूल्यांकन करते हुए कहा:

  1. धोखाधड़ी का इरादा: अभियोजन पक्ष को यह साबित करना आवश्यक होता है कि वादा करते समय आरोपी की नीयत शुरू से ही शादी करने की नहीं थी और उसने केवल संबंध बनाने के उद्देश्य से महिला को बहलाया था।

  2. परिस्थितिजन्य बदलाव: यदि शुरुआत में धोखाधड़ी की नीयत साबित नहीं होती, तो केवल बाद में पैदा हुई विषम परिस्थितियों के आधार पर आपराधिक मामला कायम नहीं रखा जा सकता।

अदालत ने माना कि दोनों पक्षों का आपस में विवाह हो जाना और महिला द्वारा केस आगे न बढ़ाने की इच्छा व्यक्त करना एक निर्णायक परिस्थिति है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट ने कटघोरा थाने में दर्ज एफआईआर, पुलिस चार्जशीट और निचली अदालत की सभी आपराधिक कार्यवाहियों को निरस्त (Quash) कर दिया।

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