Monday, August 24, 2026
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Turridham Sawan Fourth Monday Mela Sakti: तुर्रीधाम में उमड़ा आस्था का महासैलाब: गर्भगृह की प्राकृतिक जलधारा से स्वयं होता है भोलेनाथ का अभिषेक

सक्ती [Nishanebaaz News]। Turridham Sawan Fourth Monday Mela Sakti के अवसर पर जिला मुख्यालय से लगभग 13 किलोमीटर दूर स्थित सुप्रसिद्ध प्राचीन शिवधाम ‘तुर्रीधाम’ में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सावन माह के चौथे और अंतिम सोमवार पर भोलेनाथ के दर्शन व जलाभिषेक के लिए तड़के से ही मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। करीब 147 वर्ष पुरानी मान्यताओं को समेटे इस पवित्र धाम में न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी हजारों की संख्या में शिवभक्त दर्शन के लिए पहुंचे।

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गर्भगृह की रहस्यमयी जलधारा है आकर्षण का केंद्र

तुर्रीधाम मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता और पहचान इसके गर्भगृह में प्राकृतिक रूप से निकलने वाली निरंतर जलधारा है। स्थानीय जनश्रुति और मंदिर के पुजारियों के अनुसार, इस जलधारा का उद्गम स्थल आज भी एक रहस्य बना हुआ है। माना जाता है कि भगवान शिव का अभिषेक स्वयं प्रकृति द्वारा किया जाता है। सावन के अंतिम सोमवार को भक्तों ने इसी पवित्र जलधारा से बाबा भोलेनाथ का पूजन कर पुण्य लाभ कमाया।

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147 साल पुरानी मान्यता: राजा लीलाधर के स्वप्न से जुड़ा है इतिहास

मंदिर के मुख्य पुजारियों ने बताया कि तुर्रीधाम का इतिहास घने जंगलों, गाय के बछड़े से जुड़ी रहस्यमयी घटना और तत्कालीन राजा लीलाधर को आए एक दिव्य स्वप्न से संबंधित है। स्वप्न में मिले निर्देश के बाद जंगल के बीच छिपे इस शिवलिंग की खोज की गई और कालंतर में यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया, जो आज पूरे अंचल के लिए विशेष आस्था और शक्ति का केंद्र बन चुका है।

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शिवभक्ति के बीच गूंजी गौ-संरक्षण की आवाज

सावन सोमवार के इस भव्य मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सामाजिक चेतना का नजारा भी देखने को मिला। ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ से जुड़े गौभक्तों ने मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं से गौवंश संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने आम लोगों और युवाओं से गौ-तस्करी तथा गौ-हत्या रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियानों से जुड़ने का आह्वान किया।

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