[nishaanebaz.com] Indore News: इंदौर। शहर के चर्चित डीपी ज्वेलर्स में आभूषण तौलने वाले कांटे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के अधिवक्ता अंशुमान जाट ने आरोप लगाया कि ज्वेलर्स में इस्तेमाल किए जा रहे नाप-तौल कांटे पर जरूरी विभागीय सील और मुहर दिखाई नहीं दे रही थी। कांटे से संबंधित वैध प्रमाण-पत्र मांगे जाने पर उसे तत्काल प्रस्तुत नहीं किए जाने का भी आरोप है। मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस और नाप-तौल विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की।
आभूषण खरीदने के बाद कांटे की वैधता पर उठाया सवाल
जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता अंशुमान जाट आभूषण खरीदने के लिए डीपी ज्वेलर्स पहुंचे थे। खरीदारी के बाद जब उन्होंने आभूषण का वजन कराने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कांटे को देखा, तो उसकी वैधता को लेकर जानकारी मांगी।जाट का कहना है कि कांटे पर नाप-तौल विभाग की आवश्यक सील और मुहर नजर नहीं आई। इसके बाद उन्होंने ज्वेलर्स के कर्मचारियों से कांटे से संबंधित वैध प्रमाण-पत्र दिखाने को कहा और प्रबंधक को बुलाने की मांग की।
प्रमाण-पत्र को लेकर हुआ विवाद
अधिवक्ता के आरोप के मुताबिक, प्रमाण-पत्र दिखाने को लेकर काफी देर तक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। इसी दौरान मामला और गंभीर हो गया, जब ज्वेलर्स की ओर से एक व्यक्ति डिब्बा लेकर मौके पर पहुंचा।जाट के अनुसार, डिब्बे में अलग-अलग सील रखी हुई थीं और इसके बाद कांटे पर सील लगाने का प्रयास किया जाने लगा। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की अपने मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्डिंग भी की।हालांकि, कांटे की वैधता और सील से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पुलिस और नाप-तौल विभाग की टीम पहुंची
मामला सामने आने के बाद अधिवक्ता ने पुलिस को सूचना दी। इसके साथ ही नाप-तौल विभाग के अधिकारियों को भी जानकारी दी गई। सूचना मिलने पर निरीक्षक संजय पाटणकर और निरीक्षक खेमराज ठाकुर मौके पर पहुंचे।अधिकारियों ने ज्वेलर्स में इस्तेमाल किए जा रहे कांटे और उससे संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू की। विभागीय टीम यह पता लगाने में जुटी है कि कांटा नियमानुसार सत्यापित और प्रमाणित था या नहीं और उस पर आवश्यक सील-मुहर की स्थिति क्या थी।
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— Nishaanebaz.com (@nishaanebaz_com) August 23, 2026
उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा मामला बताया
अधिवक्ता अंशुमान जाट ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रतिष्ठान को बदनाम करना नहीं है। उनका कहना है कि मामला सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के हित और नाप-तौल में पारदर्शिता से जुड़ा है।उनके मुताबिक, आभूषण खरीदते समय ग्राहक के लिए वजन की सटीकता बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में ज्वेलर्स में इस्तेमाल होने वाले नाप-तौल उपकरणों का नियमानुसार सत्यापन और प्रमाणन होना जरूरी है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
Indore News: फिलहाल मामले में विभागीय जांच जारी है। अधिकारियों द्वारा कांटे के प्रमाण-पत्र, सत्यापन और सील-मुहर से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है।जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कांटा नियमों के मुताबिक प्रमाणित था या नहीं और उस पर सील को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। मामले से संबंधित वीडियो और अन्य साक्ष्य भी जांच के लिए उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई है।फिलहाल इस पूरे विवाद ने सोने की शुद्धता के साथ-साथ आभूषण तौलने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और उपभोक्ता के अधिकारों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।





