CG 1047 Wheat Variety: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- छत्तीसगढ़ के गेहूं किसानों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। बिलासपुर में गेहूं की एक नई बायोफोर्टिफाइड किस्म विकसित की गई है, जो कम सिंचाई वाले इलाकों के किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अंतर्गत संचालित अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान परियोजना के वैज्ञानिकों ने CG 1047 यानी छत्तीसगढ़ ट्रॉम्बे कुमुद किस्म तैयार की है।इस नई किस्म को करीब 10 साल की रिसर्च के बाद विकसित किया गया है। खास बात यह है कि कम पानी में भी अच्छी पैदावार देने के साथ इसमें आयरन, जिंक और प्रोटीन की अच्छी मात्रा मौजूद है।
CG 1047 गेहूं किस्म को लंबे रिसर्च के बाद तैयार किया गया है। इसके विकास में गेहूं वैज्ञानिक डॉ. अजय प्रकाश अग्रवाल की अहम भूमिका रही। इस काम में मुंबई के भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, ट्रॉम्बे के वैज्ञानिकों का भी सहयोग मिला। वहां इस किस्म के कई सूक्ष्म गुणों की जांच की गई।इस किस्म को वर्ष 2025 में आयोजित गेहूं वैज्ञानिकों की कार्यशाला में पहचान मिली। इसके बाद इसे किसानों के लिए एक उपयोगी नई किस्म के तौर पर देखा जा रहा है।
कम पानी में भी देगी अच्छी उपज
CG 1047 wheat variety की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम सिंचाई में उत्पादन देने की क्षमता है। इसे खास तौर पर अधिसिंचित यानी कम पानी वाले क्षेत्रों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।जानकारी के अनुसार, इस गेहूं की फसल को 2 से 3 सिंचाई में भी अच्छी तरह तैयार किया जा सकता है। इसके परीक्षण में औसत उत्पादन करीब 36.7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज किया गया है। समय पर बुवाई और सही खेती प्रबंधन से उत्पादन को और बेहतर किया जा सकता है।
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आयरन और जिंक की अच्छी मात्रा
बायोफोर्टिफाइड गेहूं CG 1047 सिर्फ पैदावार के लिहाज से ही खास नहीं है, बल्कि पोषण के मामले में भी इसे बेहतर माना जा रहा है। इसमें 41.7 PPM आयरन और 41.7 PPM जिंक पाया गया है।इसके अलावा इसमें 12 प्रतिशत से अधिक प्रोटीन मौजूद है। चपाती बनाने के टेस्ट में इसे 8.0/10 का स्कोर मिला है। वहीं बिस्किट स्प्रेडिंग टेस्ट में इसका स्कोर 8.7/10 रहा। यानी इससे चपाती के साथ-साथ बिस्किट भी बनाए जा सकते हैं।
107 से 110 दिन में तैयार होगी फसल
छत्तीसगढ़ ट्रॉम्बे कुमुद गेहूं की फसल अवधि करीब 107 से 110 दिन है। पौधों की ऊंचाई 85 से 90 सेंटीमीटर के बीच रहती है। इसके 1000 दानों का वजन करीब 41.5 ग्राम दर्ज किया गया है।इस किस्म के दानों का रंग अम्बर यानी गेहुआं बताया गया है। इसका पैरेंट HW 2004/PSS 725 है।
कई वैज्ञानिकों ने मिलकर किया विकास
CG 1047 गेहूं का विकास कई वैज्ञानिकों के सामूहिक प्रयास का नतीजा है। यह काम इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल और संचालक अनुसंधान डॉ. विवेक त्रिपाठी के मार्गदर्शन में हुआ।बिलासपुर केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सजय कुमार वर्मा के साथ डॉ. एन.के. चौरे, डॉ. एस.के. सिन्हा, डॉ. सुनील नाग, डॉ. डी.जे. शर्मा और तकनीकी सहायक माधुरी ग्रेस मिंज का भी इस काम में योगदान रहा।
कम सिंचाई वाले किसानों के लिए क्यों खास है यह गेहूं?
CG 1047 wheat variety ऐसे किसानों के लिए खास हो सकती है, जहां सिंचाई के साधन सीमित हैं। सामान्य गेहूं की खेती में कई बार पानी की उपलब्धता उत्पादन को प्रभावित करती है। ऐसे में 2-3 सिंचाई में अच्छी उपज देने वाली किस्म किसानों की लागत और पानी दोनों को बचाने में मदद कर सकती है।इसके साथ ही आयरन, जिंक और प्रोटीन की अच्छी मात्रा इसे पोषण के लिहाज से भी उपयोगी बनाती है। नई किस्म के विकास से छत्तीसगढ़ में गेहूं की खेती को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।





