Saturday, August 22, 2026
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MP News: बैतूल वन विभाग में 55 हजार की रिश्वत मामले पर सवाल, ट्रैप कार्रवाई के बाद भी बाबू का निलंबन नहीं

[Nishaanebaz News] MP News:शशांक सोनकपुरिया\ बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के वन विभाग में कथित भ्रष्टाचार के एक मामले को लेकर विभागीय कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि 55 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई में पकड़े गए एक लिपिक, जिसे आमतौर पर बाबू कहा जाता है, के खिलाफ अब तक निलंबन की कार्रवाई नहीं की गई। इसके बजाय उसे दूसरे डिवीजन में अटैच कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद विभाग की कार्यप्रणाली और आरोपी कर्मचारी को कथित संरक्षण मिलने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

मामले में एक कंप्यूटर ऑपरेटर भी कार्रवाई की जद में आया था। बताया जा रहा है कि उसके खिलाफ अलग कार्रवाई करते हुए उसे हटा दिया गया, लेकिन लिपिक को केवल दूसरे कार्यालय में अटैच किए जाने से सवाल खड़े हो रहे हैं।

55 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े जाने का मामला

सूत्रों के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाकर कार्रवाई की थी। इस दौरान वन विभाग से जुड़े लिपिक और कंप्यूटर ऑपरेटर को कथित तौर पर 55 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। लोकायुक्त की टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए प्रकरण दर्ज किया था।

लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद उम्मीद की जा रही थी कि विभाग की ओर से भी आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे। लेकिन विभाग द्वारा लिपिक को निलंबित करने के बजाय दूसरे डिवीजन में अटैच किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद सवाल उठने लगे हैं।

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निलंबन की जगह दूसरे डिवीजन में अटैचमेंट

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद भी संबंधित लिपिक को निलंबित क्यों नहीं किया गया। आरोप है कि विभाग ने उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के बजाय केवल अटैचमेंट का आदेश जारी किया।सूत्रों का यह भी दावा है कि अटैचमेंट से जुड़े आदेश में लोकायुक्त या विजिलेंस की कार्रवाई का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। इसे लेकर विभागीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं कि आखिर कार्रवाई से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को आदेश में शामिल क्यों नहीं किया गया।हालांकि, विभाग की ओर से इस संबंध में अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

कार्रवाई के बाद भी दो दिन कार्यालय आने का आरोप

मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। सूत्रों का कहना है कि ट्रैप कार्रवाई के बाद संबंधित लिपिक करीब दो दिन तक कार्यालय पहुंचा और अपनी सीट पर बैठकर काम करता रहा। बाद में उसे दूसरे स्थान पर अटैच करने और चार्ज सौंपने की प्रक्रिया की गई।इसी को लेकर कुछ लोगों ने कार्यालय के दस्तावेजों से संभावित छेड़छाड़ की आशंका भी जताई है। उनका कहना है कि यदि कार्यालय परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि कार्रवाई के बाद संबंधित कर्मचारी कितने समय तक कार्यालय में मौजूद रहा और उसने कौन-कौन से कार्य किए।हालांकि, दस्तावेजों से छेड़छाड़ के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसकी सच्चाई किसी जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।

वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण के भी आरोप

विभागीय सूत्रों के अनुसार, संबंधित लिपिक को वरिष्ठ स्तर पर कथित संरक्षण मिलने के आरोप लगाए जा रहे हैं। डीएफओ और सीसीएफ स्तर पर संरक्षण मिलने की चर्चा भी विभाग के भीतर चल रही है।हालांकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तभी यह स्पष्ट हो सकेगा कि विभागीय कार्रवाई में देरी या नरमी के पीछे कोई विशेष कारण था या नहीं।

अन्य पीड़ितों के सामने आने में डर की आशंका

मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि रिश्वतखोरी के आरोप में पकड़े जाने के बाद भी संबंधित कर्मचारी के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई नहीं होती, तो भविष्य में अन्य पीड़ित या शिकायतकर्ता सामने आने से डर सकते हैं।विभागीय कर्मचारियों के बीच भी यह चर्चा है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रिश्वत की कथित मांग और लेन-देन में सिर्फ दो लोग शामिल थे या इसके पीछे कोई और नेटवर्क भी काम कर रहा था।

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अटैचमेंट की कार्रवाई पर उठे कई सवाल

पूरे मामले ने अब वन विभाग और प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—

  • लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई के बाद लिपिक को निलंबित क्यों नहीं किया गया?
  • अटैचमेंट आदेश में विजिलेंस या लोकायुक्त कार्रवाई का उल्लेख क्यों नहीं है?
  • ट्रैप कार्रवाई के बाद आरोपी के दो दिन तक कार्यालय आने के आरोपों की जांच होगी या नहीं?
  • क्या कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जाएगी?
  • रिश्वतखोरी के मामले में विभागीय स्तर पर अलग से कोई जांच शुरू की गई है या नहीं?

डीएफओ और सीसीएफ के जवाब का इंतजार

लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद विभाग द्वारा की गई प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि बैतूल वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में कोई स्पष्ट जवाब देते हैं या विभागीय जांच के जरिए पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जाती है।: इस संबंध में डीएफओ और सीसीएफ का पक्ष जानने का प्रयास किया जा रहा है। उनका आधिकारिक जवाब मिलने के बाद खबर को अपडेट किया जाएगा।

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