[Nishaanebaz News] MP Digital Farmer ID: मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश के किसानों के लिए सरकारी योजनाओं से जुड़ी एक अहम जानकारी सामने आई है। राज्य में किसानों की डिजिटल पहचान तैयार करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। MP डिजिटल फार्मर ID को अब कई सरकारी सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। ऐसे में जिन किसानों की ID अभी तक नहीं बनी है, उन्हें समय रहते इसे बनवाने की सलाह दी गई है।
सरकार ने यह अभियान 20 अगस्त से शुरू किया है और इसे 15 सितंबर 2026 तक चलाने की योजना है। यानी किसानों के पास अपनी जानकारी दर्ज कराने और MP डिजिटल फार्मर ID बनवाने के लिए सीमित समय है। इस अभियान में कई सरकारी विभाग मिलकर गांवों में किसानों की मदद करेंगे।
बिना ID इन सुविधाओं में आ सकती है परेशानी
सरकार का उद्देश्य किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से दिलाना और खेती से जुड़ी सेवाओं को डिजिटल सिस्टम से जोड़ना है। MP डिजिटल फार्मर ID के जरिए किसान की जमीन और दूसरी जरूरी जानकारी को एक डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा।बताई गई व्यवस्था के अनुसार, ID नहीं होने पर समर्थन मूल्य पर गेहूं, चना, सरसों, धान और मूंग जैसी फसलों की बिक्री में परेशानी आ सकती है। इसके अलावा खाद, बीज अनुदान, कृषि यंत्रों की सब्सिडी और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी सुविधाओं से जुड़े लाभ पर भी असर पड़ सकता है।
15 सितंबर तक चलेगा विशेष अभियान
किसानों की ID बनाने के लिए सरकार ने 20 अगस्त से विशेष अभियान शुरू किया है। यह अभियान 15 सितंबर तक चलेगा। MP डिजिटल फार्मर ID बनाने के लिए कृषि, राजस्व, सहकारिता और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारी गांवों में काम करेंगे।इस दौरान जिन किसानों की ID अभी नहीं बनी है, उनकी पहचान कर शिविर लगाए जाएंगे। विभागों की टीम किसानों को जरूरी प्रक्रिया पूरी करने में सहायता करेगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जा सके।
रबी सीजन के लिए भी खास तैयारी
सरकार ने यह अभियान रबी सीजन की तैयारी से भी जोड़ा है। किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर अग्रिम खाद उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। MP डिजिटल फार्मर ID बनने के बाद किसानों को सहकारी व्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी।इसका उद्देश्य यह है कि अक्टूबर-नवंबर में खाद की जरूरत बढ़ने पर किसानों को सोसायटियों में लंबी लाइन लगाने की स्थिति कम हो। किसानों को पहले से खाद उठाने की सुविधा देने की तैयारी की जा रही है।
राजस्व विभाग की होगी अहम भूमिका
राजस्व विभाग ग्राम पंचायत स्तर पर उन किसानों की सूची तैयार करेगा जिनकी MP डिजिटल फार्मर ID अभी नहीं बनी है। इसके बाद कैंप लगाकर छूटे हुए किसानों की ID बनाने का काम किया जाएगा।इसके साथ ही किसानों की जमीन से जुड़े सर्वे और खसरा रिकॉर्ड को भी डिजिटल ID से जोड़ने की प्रक्रिया की जाएगी। इससे किसान की जमीन और सरकारी रिकॉर्ड को एक सिस्टम में जोड़ने में मदद मिलेगी।
सहकारिता विभाग बनाएगा PACS सदस्य
सहकारिता विभाग किसानों को प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों यानी PACS का सदस्य बनाने में मदद करेगा। इसके बाद पात्र किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।MP डिजिटल फार्मर ID के साथ यह व्यवस्था किसानों को रबी सीजन के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज पर अग्रिम खाद लेने में भी मदद कर सकती है। विभाग की ओर से ई-टोकन जनरेट करने में भी किसानों की सहायता की जाएगी।
पंचायतों में लगाए जाएंगे कैंप
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग गांवों में शिविर लगाने और किसानों तक अभियान की जानकारी पहुंचाने का काम करेगा। पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सहायकों की मौजूदगी भी इन गतिविधियों में जरूरी रखी गई है।किसानों को MP डिजिटल फार्मर ID बनवाने की प्रक्रिया समझाने के साथ उन्हें सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी भी दी जाएगी। गांवों में प्रचार के जरिए ज्यादा से ज्यादा किसानों को अभियान से जोड़ने की तैयारी है।
कृषि विभाग देगा ट्रेनिंग
कृषि विकास विभाग अभियान में जुड़े कर्मचारियों को ट्रेनिंग देगा। विभाग की टीम पंचायत स्तर पर ई-विकास पोर्टल और टोकन की प्रक्रिया को समझाएगी। किसानों को मिट्टी की जांच और जरूरत के मुताबिक खाद के इस्तेमाल की जानकारी भी दी जाएगी।सरकार की इस पूरी व्यवस्था का मकसद किसानों को सरकारी सेवाओं से जोड़ना और खाद वितरण से लेकर फसल बिक्री तक की प्रक्रिया को आसान बनाना है। इसलिए जिन किसानों की MP डिजिटल फार्मर ID अभी नहीं बनी है, उन्हें 15 सितंबर की समय सीमा से पहले संबंधित शिविर या सरकारी व्यवस्था के जरिए प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए।





