बेमेतरा [Nishanebaaz News]Bemetara Jogipur School Building Cracks Controversy। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उसमें बढ़ती जा रही लापरवाही को उजागर करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। बेमेतरा जिले के ग्राम जोगीपुर में लगभग 28 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किए गए शासकीय स्कूल के नवीन भवन का काम पूरी तरह शुरू होने और विभाग को हैंडओवर किए जाने से पहले ही उसकी गुणवत्ता की पोल खुल गई है। नए भवन की दीवारों और फर्श पर लगी टाइल्स में जगह-जगह गहरी दरारें नजर आने लगी हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जोगीपुर में छात्र-छात्राओं के अध्ययन हेतु इस नए प्राथमिक/माध्यमिक स्कूल भवन का निर्माण कराया गया है। करीब 28 लाख रुपये की स्वीकृत राशि से निर्मित इस भवन के अभी उपयोग में आने की शुरुआत भी नहीं हुई है, लेकिन दावा किया जा रहा है कि भवन परिसर में लगभग 28 अलग-अलग स्थानों पर छोटी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं। दीवारों के साथ-साथ फर्श की टाइल्स का भी चटकना और दरकना घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग की ओर साफ इशारा कर रहा है।
सुरक्षा और मजबूती को लेकर ग्रामीणों की बढ़ी चिंता हैंडओवर से पहले ही भवन की इस बदहाली को देखकर गांव वालों का गुस्सा फूट पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य के शुरुआती दौर में ही भवन का यह हाल है, तो आने वाले समय में यहां पढ़ने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों की सुरक्षा का क्या होगा? घटिया सामग्री और लापरवाही के कारण किसी भी समय कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य के दौरान संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी मौके पर जाकर सामग्री की गुणवत्ता और निर्माण मानकों का निरीक्षण नहीं किया।
तकनीकी जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग मामले के तूल पकड़ने के बाद अब ग्रामीण प्रशासन से इस पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में संलिप्त ठेकेदार, इंजीनियर और निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ तत्काल सख्त अनुशासनात्मक व कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल देखना होगा कि प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों की इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कब तक सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं।





