Monday, September 28, 2026
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CG News: अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट का अहम फैसला! दूसरी शादी से जन्मा बेटा भी नौकरी का हकदार

Nishaanebaz News Desk-CG Anukampa Niyukti Case: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला सुनाते हुए एक अहम स्थिति स्पष्ट की है। कोर्ट ने कहा कि दूसरी शादी से जन्मा बेटा भी नियमों के तहत अनुकंपा नियुक्ति का पात्र हो सकता है। हालांकि, अगर एक ही श्रेणी में दो बेटों की ओर से नियुक्ति के दावे किए जाते हैं, तो उम्र में बड़े बेटे को पहली प्राथमिकता दी जाएगी।यह फैसला उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जहां सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके आश्रितों के बीच अनुकंपा नियुक्ति को लेकर विवाद होता है।

हाईकोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ इस आधार पर कि बेटा दूसरी शादी से जन्मा है, उसे अनुकंपा नियुक्ति के अधिकार से बाहर नहीं किया जा सकता। अनुकंपा नियुक्ति पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला इस मामले में पात्रता को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।कोर्ट के अनुसार संबंधित नियमों के तहत दूसरी शादी से जन्मा बेटा भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए जायज और पात्र दावेदार माना जा सकता है। यानी केवल जन्म की स्थिति के आधार पर उसका दावा खारिज नहीं किया जा सकता।

दो बेटों के दावे पर किसे मिलेगी नौकरी?
मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात तब सामने आती है जब एक ही श्रेणी में दो बेटों की ओर से अनुकंपा नियुक्ति का दावा किया जाता है। अनुकंपा नियुक्ति पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला ऐसे मामलों में प्राथमिकता का आधार भी स्पष्ट करता है।कोर्ट ने कहा कि यदि दोनों बेटे समान श्रेणी में पात्र दावेदार हैं, तो उम्र में बड़े बेटे को पहली प्राथमिकता दी जाएगी। यानी दोनों के दावों की स्थिति समान होने पर बड़ा बेटा आगे रहेगा।

जस्टिस संजय के अग्रवाल की सिंगल बेंच का फैसला
यह फैसला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस संजय के अग्रवाल की सिंगल बेंच ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामले में सुनाया है। अनुकंपा नियुक्ति पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला संबंधित नियमों की व्याख्या करते हुए सामने आया।कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति में पात्रता और प्राथमिकता के बीच अंतर को स्पष्ट किया। दूसरी शादी से जन्मा बेटा पात्र हो सकता है, लेकिन समान श्रेणी में दो दावेदार होने पर उम्र के आधार पर प्राथमिकता तय होगी।
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अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य क्या है?
अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य किसी सरकारी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उसके परिवार को आर्थिक संकट से राहत देना है। इसके तहत पात्र आश्रित को सरकारी सेवा में नियुक्ति देने का प्रावधान होता है, लेकिन इसके लिए संबंधित विभाग के नियमों और पात्रता शर्तों का पालन जरूरी होता है।अनुकंपा नियुक्ति पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला इसी प्रक्रिया में परिवार के अलग-अलग सदस्यों के दावे को लेकर महत्वपूर्ण दिशा स्पष्ट करता है।

सिर्फ दूसरी शादी का आधार बनाकर दावा नहीं होगा खारिज
फैसले का एक अहम पहलू यह है कि दूसरी शादी से जन्मे बेटे को केवल इसी कारण से अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर मामले में उसे स्वतः नियुक्ति मिल जाएगी।उसे संबंधित नियमों के तहत पात्रता पूरी करनी होगी। अनुकंपा नियुक्ति पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला यह स्पष्ट करता है कि पात्रता के बाद अगर समान श्रेणी में दूसरा बेटा भी दावेदार है, तो उम्र में बड़े बेटे को प्राथमिकता मिलेगी।

दो दावेदारों के मामलों में नियम स्पष्ट
हाईकोर्ट के इस फैसले से उन मामलों में स्थिति कुछ हद तक साफ होती है जहां एक मृत सरकारी कर्मचारी के दो बेटे अनुकंपा नियुक्ति का दावा करते हैं। अनुकंपा नियुक्ति पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला बताता है कि दोनों दावेदारों की श्रेणी समान होने पर उम्र एक महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।ऐसे मामलों में संबंधित विभाग को नियमों के अनुसार पात्रता की जांच करने के बाद प्राथमिकता तय करनी होगी।

फैसले से क्या बदलेगा?
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह फैसला अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े भविष्य के मामलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। अनुकंपा नियुक्ति पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला दूसरी शादी से जन्मे बेटे की पात्रता को लेकर स्थिति स्पष्ट करता है और साथ ही समान श्रेणी के दो दावेदारों के बीच प्राथमिकता का आधार भी बताता है।अब ऐसे मामलों में सिर्फ दूसरी शादी से जन्म लेने के आधार पर बेटे का दावा खारिज नहीं किया जा सकेगा। वहीं, अगर दोनों बेटे नियमों के तहत समान श्रेणी में पात्र हैं, तो उम्र में बड़े बेटे को पहली प्राथमिकता दी जाएगी।

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