सरगुजा की 400 KM कांवड़ यात्रा की शुरुआत वाराणसी के अस्सी घाट से हुई। विधायक रामकुमार टोप्पो ने यहां गंगाजल उठाया और कांवड़ियों के साथ यात्रा शुरू की।यात्रा में करीब 150 श्रद्धालु शामिल हैं। वाराणसी से गंगाजल लेकर यह जत्था पैदल सरगुजा की ओर बढ़ेगा। इस दौरान कांवड़ियों के लिए यह यात्रा आस्था और श्रद्धा से जुड़ा लंबा सफर होगी।
मैनपाट के शिव मंदिर में होगा जलाभिषेक
करीब 12 दिनों तक चलने वाली सरगुजा की 400 KM कांवड़ यात्रा का अंतिम पड़ाव मैनपाट क्षेत्र में स्थित चोरकीपानी का स्वयंभू शिव मंदिर होगा।कांवड़िए वाराणसी से लाए गए गंगाजल को मंदिर तक पहुंचाएंगे। इसके बाद भगवान शिव का गंगाजल से जलाभिषेक किया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिल रहा है।
पांच साल से जारी है यह परंपरा
बताया जा रहा है कि वाराणसी से सरगुजा तक की यह कांवड़ यात्रा पिछले पांच वर्षों से लगातार आयोजित की जा रही है। सरगुजा की 400 KM कांवड़ यात्रा हर साल श्रद्धालुओं को जोड़ती है और बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल होते हैं।श्रद्धालु वाराणसी के गंगा घाट से गंगाजल लेकर पैदल मैनपाट पहुंचते हैं। वहां स्वयंभू शिव मंदिर में जलाभिषेक के साथ यात्रा पूरी होती है।
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इस बार विधायक भी पूरी यात्रा में पैदल
इस बार इस धार्मिक यात्रा में सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो भी कांवड़ियों के साथ शामिल हुए हैं। सरगुजा की 400 KM कांवड़ यात्रा में विधायक पूरी दूरी पैदल तय करने की तैयारी में हैं।अस्सी घाट पर गंगाजल उठाने के बाद उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ यात्रा शुरू की। करीब 150 कांवड़ियों का जत्था अब लगातार पैदल चलते हुए सरगुजा की ओर बढ़ेगा।
12 दिनों तक जारी रहेगा पैदल सफर
वाराणसी से मैनपाट तक का सफर करीब 400 किलोमीटर से अधिक बताया जा रहा है। सरगुजा की 400 KM कांवड़ यात्रा को पूरा करने में कांवड़ियों को करीब 12 दिन लगेंगे।इस दौरान श्रद्धालु गंगाजल को सुरक्षित लेकर चलेंगे। यात्रा के दौरान धार्मिक माहौल बना रहेगा और तय स्थान पर पहुंचने के बाद भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा।
आस्था के साथ पूरा होगा लंबा सफर
यह यात्रा सिर्फ लंबी दूरी तय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए भगवान शिव के प्रति आस्था से जुड़ी हुई है। सरगुजा की 400 KM कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़िए वाराणसी से लाए गए गंगाजल को मैनपाट तक पहुंचाएंगे।सावन के महीने में होने वाली इस यात्रा का समापन चोरकीपानी के स्वयंभू शिव मंदिर में जलाभिषेक के साथ होगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि 12 दिनों के पैदल सफर के बाद कांवड़ियों का जत्था कब मैनपाट पहुंचेगा और वहां किस तरह जलाभिषेक किया जाएगा।