चेन्नई [Nishanebaaz News]Tamil Nadu Assembly Resolution Against Delimitation FCRA। तमिलनाडु की सी. जोसेफ विजय (C. Joseph Vijay) नीत सरकार ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की दो प्रमुख योजनाओं—लोकसभा सीटों का परिसीमन (Delimitation) और विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 (FCRA Bill)—के खिलाफ राज्य विधानसभा से ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किए हैं। परिसीमन और एफसीआरए के खिलाफ इस तरह का सख्त कदम उठाने वाला तमिलनाडु देश का पहला राज्य बन गया है।
दिलचस्प बात यह रही कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी होने के बावजूद एम.के. स्टालिन की पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने मुख्यमंत्री विजय द्वारा लाए गए इन प्रस्तावों का पूर्ण समर्थन किया।
परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव: 543 ही रहे लोकसभा सीटों की संख्या
12 अगस्त को मुख्यमंत्री विजय ने खुद विधानसभा में परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, जिस पर करीब दो घंटे तक तीखी बहस के बाद सदन की मंजूरी मिल गई। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से अपील की गई है कि लोकसभा सदस्यों की कुल संख्या 543 पर ही स्थिर रखी जाए।
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जनसंख्या नियंत्रण की सजा न मिले: प्रस्ताव में कहा गया है कि जिन दक्षिणी राज्यों ने राष्ट्रीय जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों को सफलता से लागू किया है, परिसीमन के कारण संसद में उनका प्रतिनिधित्व कम नहीं होना चाहिए।
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33% महिला आरक्षण में न हो देरी: सीएम विजय ने जोर देकर कहा कि परिसीमन की आड़ में महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण को लागू करने में और विलंब नहीं किया जाना चाहिए।
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DMK का रुख: डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि अगले 25 वर्षों तक निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन स्थगित रहना चाहिए। टीवीके (TVK) के मंत्री आधव अर्जुन ने समर्थन के लिए डीएमके का आभार व्यक्त किया।
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पी. चिदंबरम का समर्थन: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने प्रस्ताव की सराहना करते हुए कहा, “अगर सीटों की संख्या अत्यधिक बढ़ाई गई तो संसद चीन की असेंबली जैसी बनकर रह जाएगी, सदन नहीं बचेगी। दक्षिण के राज्यों का अनुपात बना रहना चाहिए।”
FCRA संशोधन विधेयक और NEET के खिलाफ भी प्रस्ताव पारित
परिसीमन के अलावा तमिलनाडु विधानसभा ने दो अन्य बड़े मुद्दों पर भी प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला:
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FCRA संशोधन विधेयक 2026: तमिलनाडु सरकार ने मंगलवार को एफसीआरए बिल के खिलाफ प्रस्ताव पास किया। स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन द्वारा पेश इस प्रस्ताव में कहा गया कि इस कानून से अल्पसंख्यक शैक्षणिक और कल्याणकारी परमार्थ संगठनों की स्वायत्तता प्रभावित होगी। भारी विरोध को देखते हुए केंद्र ने फिलहाल इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया है।
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NEET परीक्षा समाप्त करने की मांग: विधानसभा ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को रद्द करने और राज्य में 12वीं कक्षा के अंकों (Board Marks) के आधार पर मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिला देने का प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित किया।
नीट विरोधी प्रस्ताव को DMK, AIADMK, PMK और वामपंथी दलों का समर्थन मिला, जबकि भाजपा (BJP) विधायक भोजराजन ने इसका विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट किया।

