Unique Temple in Chhattisgarh: माँ मातंगी धाम में बंद घड़ी शुरू करती है जीवन का अच्छा समय; घड़ी, घंटी और ताला बांधने से पूरी होती है मनोकामना

VIKASH KHALKHO

Unique Temple in Chhattisgarh: रायपुर/धमतरी (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध लोक संस्कृति, धार्मिक आस्था और अनोखी परंपराओं के लिए जाना जाता है। इसी कड़ी में प्रदेश में एक ऐसा अनोखा और चमत्कारिक मंदिर भी मौजूद है, जहाँ भगवान को फूल-प्रसाद के साथ-साथ दीवार घड़ी, घंटी और ताला चढ़ाने की अनूठी परंपरा है। हम बात कर रहे हैं धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड अंतर्गत ग्राम जीजामगांव (बिरेझर) स्थित माँ मातंगी देवी धाम की, जो इन दिनों अपनी अद्भुत धार्मिक मान्यताओं के कारण देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

भौगोलिक स्थिति: रायपुर से महज 45 किमी दूर स्थित है धाम

माँ मातंगी देवी का यह प्रसिद्ध धाम राजधानी रायपुर से लगभग 45 किलोमीटर की दूरी पर कुरुद विकासखंड के जीजामगांव (बिरेझर) में स्थित है। मंदिर परिसर में कदम रखते ही श्रद्धालुओं को चारों तरफ खंभों, ग्रिल और दीवारों पर टंगी हजारों घड़ियां, लटकती घंटियां और बंधे हुए ताले-नारियल दिखाई देते हैं। यह विहंगम दृश्य देश के किसी अन्य मंदिर में अमूमन देखने को नहीं मिलता।

अद्भुत मान्यता: बंद घड़ी लाती है जीवन में ‘अच्छा समय’

मंदिर की सबसे विशेष और चर्चित मान्यता परिसर में दीवार घड़ी बांधने की है।

  • पुजारी हरिओम महाराज का कथन: मंदिर के मुख्य पुजारी हरिओम महाराज ने बताया कि श्रद्धालु अपनी मन्नत मांगकर मंदिर परिसर में घड़ी बांधते हैं।

  • शुभ संकेत: स्थानीय व जनमान्यता के अनुसार, मंदिर में बांधी गई घड़ी जब चलते-चलते बंद हो जाती है, तो यह इस बात का संकेत माना जाता है कि संबंधित व्यक्ति के जीवन का बुरा समय अब समाप्त हो चुका है और उसके जीवन में एक नए व ‘अच्छे समय’ की शुरुआत होने जा रही है। इसी अटूट विश्वास के कारण मंदिर परिसर में सैकड़ों-हजारों घड़ियां बंधी नजर आती हैं।

घंटी, ताला और नारियल बांधने के अपने-अपने महत्व

पुजारी हरिओम महाराज ने धाम में निभाई जाने वाली अन्य धार्मिक परंपराओं के महत्व को साझा किया:

  1. घंटी और जंजीर बांधना: जंजीर के साथ घंटी बांधने से जीवन में आ रही पुरानी से पुरानी बाधाएं, अड़चनें और परेशानियां दूर होती हैं।

  2. ताला बांधना: रुकावटों को समाप्त करने और मन्नत को सुरक्षित करने के भाव से ताला बांधने का रिवाज है।

  3. लाल कपड़े में नारियल: लाल कपड़े में नारियल बांधकर माँ मातंगी के चरणों में प्रार्थना करने से मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।

  4. पीले कपड़े में नारियल: पीले कपड़े में नारियल बांधने की परंपरा घर-परिवार को नकारात्मक प्रभावों, दुष्ट दृष्टि और बुरी शक्तियों से रक्षा प्रदान करने की कामना से जुड़ी है।

ओडिशा, एमपी और महाराष्ट्र से पहुंच रहे श्रद्धालु; भक्तों ने साझा किए अनुभव

माँ मातंगी धाम की महिमा केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी राज्यों जैसे ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य प्रदेशों से भी बड़ी संख्या में भक्त दर्शन व मन्नत मांगने पहुंच रहे हैं।

  • कमला साहू (कोरबा): कोरबा से दर्शन करने पहुंची श्रद्धालु कमला साहू ने बताया कि उन्होंने माँ मातंगी धाम के चमत्कारों के बारे में सुना था। वे भी अपने जीवन की बाधाओं को दूर करने और सुख-समृद्धि की मनोकामना लेकर यहाँ पूजा-अर्चना करने आई हैं।

  • ज्योति साहू (दुर्ग): दुर्ग से पहुंचीं श्रद्धालु ज्योति साहू ने बताया कि विशेष रूप से घड़ी बांधने की अनूठी परंपरा के बारे में जानकर उनकी यहाँ आने की तीव्र इच्छा हुई थी। यहाँ आकर पूजा करने से उन्हें अद्भुत मानसिक शांति मिली है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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