Seoni Teacher Declared Dead Case: सिवनी शिक्षक मृत घोषित मामला मध्यप्रदेश के सिवनी जिले से सामने आया है, जहां शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। सरकारी प्राथमिक स्कूल में पदस्थ एक शिक्षक पिछले तीन साल से नियमित रूप से बच्चों को पढ़ा रहे थे। उनकी स्कूल में उपस्थिति भी दर्ज होती रही, लेकिन विभागीय रिकॉर्ड में उन्हें वर्ष 2023 से मृत दिखा दिया गया। इस चूक का खुलासा तब हुआ, जब उनका वेतन बंद हो गया।
सिवनी शिक्षक मृत घोषित मामला धनोरा विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला गोरखपुर का है। यहां पदस्थ शिक्षक विष्णु प्रसाद डेहरिया को ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय के रिकॉर्ड में 10 दिसंबर 2023 को गलती से मृत दर्ज कर दिया गया। इसके बावजूद वे नियमित रूप से स्कूल पहुंचते रहे, बच्चों को पढ़ाते रहे और उनकी उपस्थिति भी दर्ज होती रही।
वेतन बंद होने पर सामने आई बड़ी गड़बड़ी
सिवनी शिक्षक मृत घोषित मामला का खुलासा फरवरी 2026 में हुआ, जब शिक्षक का वेतन अचानक बंद कर दिया गया। कई महीनों तक वे बिना वेतन के काम करते रहे और विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाते रहे। जुलाई 2026 में जांच के दौरान पता चला कि विभागीय रिकॉर्ड में उन्हें करीब तीन साल पहले ही मृत घोषित कर दिया गया था। इसी वजह से उनका वेतन भी रोक दिया गया।
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अधिकारियों से रिकॉर्ड सुधारने की मांग
सिवनी शिक्षक मृत घोषित मामला में शिक्षक ने जिला कलेक्टर और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को आवेदन देकर विभागीय रिकॉर्ड में सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि उन्हें जीवित दर्ज किया जाए, ताकि उनका रुका हुआ वेतन जारी हो सके और सेवा संबंधी सभी दस्तावेज सही किए जा सकें। शिक्षा विभाग का कहना है कि मामले की जानकारी मिलने के बाद रिकॉर्ड सुधारने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
सिवनी शिक्षक मृत घोषित मामला ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि रिकॉर्ड में शिक्षक को वर्ष 2023 में मृत घोषित कर दिया गया था, तो उनकी रोजाना उपस्थिति, स्कूल का संचालन और अन्य विभागीय प्रक्रियाएं बिना किसी आपत्ति के कैसे चलती रहीं? यह सवाल अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
आर्थिक और मानसिक परेशानी झेल रहा शिक्षक
सिवनी शिक्षक मृत घोषित मामला के कारण शिक्षक और उनका परिवार पिछले कई महीनों से आर्थिक परेशानी का सामना कर रहा है। वेतन बंद होने से परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों पर असर पड़ा है। अब शिक्षक को उम्मीद है कि रिकॉर्ड में सुधार होने के बाद उनका वेतन बहाल होगा और इस प्रशासनिक गलती का स्थायी समाधान निकलेगा।







