Wednesday, August 26, 2026
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Apollo Hospital Bilaspur Inquiry: बिलासपुर अपोलो अस्पताल पर इलाज और एयर एंबुलेंस में लापरवाही के आरोप, स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने शुरू की जांच

Apollo Hospital Bilaspur Inquiry: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित प्रतिष्ठित अपोलो अस्पताल में मरीजों के इलाज और एयर एंबुलेंस व्यवस्था में कथित भारी लापरवाही का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पूर्व मेयर और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय राजेंद्र शुक्ला के निधन के बाद उठे सवालों और कांग्रेस नेताओं द्वारा आंदोलन की चेतावनी दिए जाने के बाद राज्य का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह हरकत में आ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने अपोलो अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सघन जांच शुरू कर दी है।

रायपुर और बिलासपुर के अधिकारी कर रहे हैं दस्तावेजों की जांच

स्वास्थ्य विभाग की उच्च स्तरीय टीम में रायपुर और बिलासपुर दोनों जिलों के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी शामिल हैं। जांच टीम ने अपोलो अस्पताल पहुंचकर मरीजों के इलाज, भर्ती प्रक्रिया, डॉक्टरों की केस शीट, मेडिकल रिकॉर्ड, दवाइयों का हिसाब, एंबुलेंस व्यवस्था और अस्पताल के प्रशासनिक व आय-व्यय से जुड़े सभी दस्तावेजों का गहन परीक्षण शुरू कर दिया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अस्पताल प्रबंधन के स्तर पर कहां और किस तरह की लापरवाही हुई है, जिसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई तय की जाएगी।

13 लाख में बुक की गई एयर एंबुलेंस, परिजनों का आरोप- अस्पताल ने नहीं दी एंबुलेंस

लापरवाही का यह पूरा मामला पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग में कार्यरत मरीज राजकुमार अग्रवाल के इलाज और स्थानांतरण से जुड़ा हुआ है। परिजनों के अनुसार, कोलकाता यात्रा के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी थी, जिसके बाद बिलासपुर में इलाज में सुधार न होने पर उन्हें चार दिन पहले अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार को डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए हैदराबाद रेफर करने की सलाह दी। इसके बाद परिजनों ने लगभग 13 लाख रुपये खर्च कर तत्काल एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की, जो बुधवार शाम चकरभाठा एयरपोर्ट पहुंच गई।

परिजनों का गंभीर आरोप है कि मरीज को एयरपोर्ट पहुंचाने के लिए अपोलो परिसर में एंबुलेंस मौजूद होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने अपनी एंबुलेंस देने से इनकार कर दिया और उन्हें निजी एंबुलेंस का इंतजाम करने को कहा। इसके अलावा मरीज के साथ अस्पताल की ओर से कोई डॉक्टर या प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ नहीं भेजा गया। इस वजह से एयरपोर्ट पहुंचने पर मरीज की हालत और बिगड़ गई और एयर एंबुलेंस की मेडिकल टीम ने जोखिम देखते हुए मरीज को हैदराबाद ले जाने से मना कर दिया।

विशेष मेडिकल टीम की निगरानी में दूसरे दिन भेजा गया हैदराबाद

मरीज की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए परिजनों को वापस अपोलो अस्पताल आना पड़ा। डॉक्टरों द्वारा विशेष सपोर्ट सिस्टम की जरूरत बताने पर अगले दिन यानी गुरुवार सुबह हैदराबाद से 3 सदस्यीय विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बुलाई गई। दिनभर मरीज को स्थिर करने के बाद शाम 7 बजे दोबारा निजी एंबुलेंस से एयरपोर्ट ले जाकर हैदराबाद भेजा गया।

इलाज और एयर एंबुलेंस पर खर्च हुए 23 लाख रुपये

परिजनों के मुताबिक, अपोलो अस्पताल में 4 दिनों के इलाज के एवज में 2.87 लाख रुपये का बिल चुकाया गया। इसके अलावा 13 लाख रुपये एयर एंबुलेंस बुकिंग, 2 लाख रुपये अतिरिक्त स्टे और हैंडलिंग चार्ज तथा 7 लाख रुपये हैदराबाद से आई विशेष मेडिकल टीम व उपकरणों पर खर्च हुए। इस प्रकार मरीज को सही समय पर हैदराबाद शिफ्ट करने में परिजनों को करीब 23 लाख रुपये खर्च करने पड़े। इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।

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