Sanatan Priests Ujjain: महाकाल की नगरी से उठी पुजारियों की हुंकार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से लगाई न्याय की गुहार; मंदिरों के सरकारीकरण और भूमि नीलामी का किया विरोध

Anuj Nirala

Sanatan Priests Ujjain: उज्जैन। धर्मनगरी उज्जैन शनिवार को सनातन पुजारी समाज की आवाज से गूंज उठी। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों पुजारियों ने श्री वैष्णव बैरागी समाज चतुः संप्रदाय के बैनर तले “सनातन पुजारी न्याय यात्रा” निकालकर अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। यात्रा के समापन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। पुजारियों ने आरोप लगाया कि मंदिरों का सरकारीकरण, मंदिरों की भूमि की नीलामी और प्रशासनिक स्तर पर हो रही कार्रवाई सनातन परंपरा और पुजारियों के अधिकारों पर सीधा प्रहार है।

सुबह से ही बड़ी संख्या में पुजारी, संत और समाजजन पारंपरिक वेशभूषा में एकत्रित हुए। हाथों में भगवा ध्वज, बैनर और मांगों से जुड़े पोस्टर लेकर निकाली गई न्याय यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई कलेक्टर कार्यालय पहुंची। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और पुजारियों ने “सनातन की रक्षा करो”, “मंदिर बचाओ, संस्कृति बचाओ” जैसे नारों के साथ अपनी मांगों को बुलंद किया।

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Sanatan Priests Ujjain: कलेक्टर कार्यालय पहुंचने के बाद सभी पुजारियों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और धार्मिक वातावरण के बीच सरकार से न्याय की अपील की। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा गया।

प्रदेश के लाखों लोगों के प्रभावित होने का दावा

सनातन पुजारी समाज का कहना है कि मध्य प्रदेश में करीब 60 हजार मंदिर हैं, जिनसे लगभग 3 लाख पुजारी परिवार जुड़े हुए हैं। समाज का दावा है कि इन परिवारों के साथ करीब 12 लाख सनातन धर्मावलंबी भी मंदिर व्यवस्था से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े हैं। उनका कहना है कि यदि मंदिरों के सरकारीकरण और भूमि नीलामी जैसी प्रक्रियाओं पर रोक नहीं लगी तो सनातन परंपराओं और मंदिरों की स्वायत्त व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

ज्ञापन में रखीं सात प्रमुख मांगें

मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में पुजारी समाज ने सात प्रमुख मांगें रखीं। इनमें—

  • मंदिरों के सरकारीकरण और समितिकरण की प्रक्रिया तत्काल समाप्त की जाए।
  • मंदिरों की भूमि की नीलामी और निस्तारीकरण पर पूर्ण रोक लगाई जाए।
  • मंदिर की मूर्तियों के स्वामित्व वाली भूमि मंदिरों को वापस दिलाई जाए।
  • पुजारियों के नामांतरण से जुड़े मामलों का शीघ्र निराकरण किया जाए।
  • मंदिरों की भूमि को भू-माफियाओं के कब्जे से सुरक्षित किया जाए।
  • पुजारियों के पारंपरिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
  • मंदिरों के संरक्षण और पारंपरिक व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए स्थायी नीति बनाई जाए।

सरकार को दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

Sanatan Priests Ujjain: पुजारी समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि सनातन परंपराओं, मंदिरों की स्वतंत्र व्यवस्था और पुजारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो प्रदेशभर में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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उज्जैन से निकली “सनातन पुजारी न्याय यात्रा” ने अब प्रदेश सरकार के सामने मंदिरों के सरकारीकरण, पुजारियों के अधिकार और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से रख दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्य सरकार पुजारी समाज की इन मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं।

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