Wednesday, August 19, 2026
Home Chhattisgarh CG Hospital License Cancelled: चिकित्सा के नाम पर मौत का खेल: GPM...

CG Hospital License Cancelled: चिकित्सा के नाम पर मौत का खेल: GPM में दो महिलाओं की जान लेने वाला ‘डी.डी. हॉस्पिटल’ सील, बिना डॉक्टर और विशेषज्ञों के हो रहे थे जटिल ऑपरेशन

CG Hospital License Cancelled: गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही: छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM) जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक बेहद गंभीर और विचलित करने वाली खबर सामने आई है। नियमों को ताक पर रखकर और मरीजों की जान से खिलवाड़ कर संचालित हो रहे सेमरा (गौरेला रोड) स्थित डी.डी. हॉस्पिटल पर प्रशासन ने विधिक रूप से अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। गंभीर लापरवाहियों के चलते दो महिला मरीजों की तड़प-तड़प कर हुई मौत के बाद जनआक्रोश को देखते हुए कलेक्टर और पर्यवेक्षी प्राधिकारी ने अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सील करने का कड़ा आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही अस्पताल का पंजीयन (लाइसेंस) भी अस्थायी और सशर्त रूप से निरस्त कर दिया गया है।

एम्बुलेंस डायवर्जन नेटवर्क और आयुष्मान के नाम पर अवैध वसूली

विधिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, विकासखंड पेण्ड्रा के ग्राम बेदरचुआ की रहने वाली ज्योति सोनवानी को 11 जून 2026 को गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल से सिम्स (SIMS) बिलासपुर रेफर किया गया था। लेकिन संवेदनहीनता की हद पार करते हुए, रास्ते में ही डी.डी. हॉस्पिटल के एक दलाल (एजेंट) ने एम्बुलेंस को रुकवा लिया और मरीज को बहला-फुसलाकर बिना मूलभूत सुविधाओं वाले इस निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। वहाँ 5 दिनों तक अत्यंत लापरवाही पूर्वक इलाज करने के बाद जब स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई, तो प्रबंधन ने उसे वापस बिलासपुर रेफर कर पल्ला झाड़ लिया, जहाँ इलाज के दौरान ज्योति ने दम तोड़ दिया। आक्रोशित परिजनों का आरोप है कि आयुष्मान योजना के अंतर्गत भर्ती होने के बावजूद उनसे 1.50 लाख रुपए तक की अवैध वसूली की गई।

ठीक इसी तरह, ग्राम जिलगा की 35 वर्षीय गर्भवती महिला लीलावती (पति आनंद सिंह) को गंभीर एनीमिया और एक्लैम्पसिया जैसी जानलेवा स्थिति में 5 जून 2026 को यहाँ भर्ती किया गया था। अस्पताल प्रबंधन को भली-भांति पता था कि उनके पास इस बीमारी के इलाज की कोई विधिक या ढांचागत सुविधा नहीं है, फिर भी मोटी रकम के लालच में नियमों के विरुद्ध उसका ऑपरेशन कर दिया गया, जिससे 20 जून को जिला अस्पताल में उसकी भी मृत्यु हो गई।

औचक निरीक्षण में खुली पोल: बिना डॉक्टर के चल रहा था अस्पताल

परिजनों के चक्काजाम और भारी जनआक्रोश के बाद जब 17 और 18 जून 2026 को प्रशासनिक अधिकारियों और डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, तो होश उड़ाने वाली हकीकत सामने आई। जांच के दौरान अस्पताल में 11 मरीज भर्ती थे, जिनमें से 3 मरीजों का गंभीर ऑपरेशन (सर्जरी) हो चुका था। लेकिन पोस्ट-ऑपरेटिव केयर के लिए पूरे अस्पताल में एक भी डॉक्टर या दक्ष नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं था। अस्पताल में न तो कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) था और न ही निश्चेतना विशेषज्ञ (Anesthetist), फिर भी धड़ल्ले से सिजेरियन और जटिल ऑपरेशन किए जा रहे थे।

कलेक्टर का कड़ा एक्शन: ओटी, आईसीयू और वार्ड सील

इस पूरे मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने 23 जून 2026 को अस्पताल प्रबंधन को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया था, जिसका अस्पताल संचालक बी.डी. अग्रवाल द्वारा 30 जून को दिया गया जवाब पूरी तरह से अतार्किक और असंतोषजनक पाया गया।

चिकित्सा के अभाव और घोर लापरवाही के कारण 2 मरीजों की मृत्यु को अत्यंत गंभीर विधिक अपराध मानते हुए कलेक्टर ने आज (4 जुलाई) को कड़ा आदेश जारी कर ‘छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम 2010’ के तहत अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है। प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर (OT), आई.सी.यू. (ICU) और जनरल वार्ड को पूरी तरह सील कर दिया है और मामले की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक (GPM) तथा स्वास्थ्य सचिव को आगे की आपराधिक और दंडात्मक कार्रवाई के लिए प्रेषित कर दी है।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here