Ranchi High Court Breaking: रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के संविदा कर्मचारियों और पारा शिक्षकों के हित में एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने एक ऐतिहासिक आदेश में स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मचारी को नियमित शिक्षक या स्थायी कर्मी बनाने से पहले उसके द्वारा संविदा (Contract) पर दी गई सेवा अवधि को भी पेंशन योग्य सेवा माना जाएगा। माननीय अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि सरकार ने नियमित नियुक्ति के समय किसी पारा शिक्षक या संविदा कर्मी के पिछले अनुभव को पात्रता का आधार माना था, तो सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन का निर्धारण करते समय उसी सेवा अवधि को नजरअंदाज या खारिज नहीं किया जा सकता।
‘पेंशन कोई उपकार नहीं, बल्कि कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है’
यह ऐतिहासिक आदेश जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने धनबाद, गिरिडीह, रामगढ़ और पाकुड़ जिलों के पांच सेवानिवृत्त शिक्षकों द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए दोहराया कि पेंशन किसी भी सरकारी कर्मचारी पर प्रशासन द्वारा किया गया कोई उपकार या बख्शीश नहीं है, बल्कि यह उसकी लंबी और निष्ठावान वैधानिक सेवा का अर्जित अधिकार है। यदि किसी कर्मचारी ने बिना किसी सेवा व्यवधान (Service Break) के पहले संविदा पर और बाद में उसी विभाग में नियमित तौर पर सेवाएं दी हैं, तो उसकी पूरी सेवा अवधि को एक साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए।
10 वर्ष की नियमित सेवा न होने पर रोक दी थी पेंशन
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया था कि वे नियमित शिक्षक बनने से पहले करीब 8 से 12 वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में पारा शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके थे। इसके बाद वे निर्धारित चयन प्रक्रिया को पूरा करके नियमित ‘इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक’ बने। हालांकि, जब वे सेवानिवृत्त हुए तो विभाग ने यह कहते हुए उन्हें पेंशन देने से साफ इनकार कर दिया कि नियमित शिक्षक के रूप में उनकी स्थायी सेवा अवधि 10 वर्ष से कुछ कम है। अदालत ने इसे पूरी तरह गैर-न्यायसंगत ठहराया और सरकार को आड़े हाथों लिया।
हजारों कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ा निर्देश दिया है कि सभी याचिकाकर्ताओं की पारा शिक्षक के रूप में बिताई गई संविदा अवधि को उनकी कुल पेंशन योग्य सेवा में जोड़ा जाए। साथ ही, उनके पेंशन एवं अन्य सभी सेवानिवृत्ति लाभों (Retirement Benefits) की दोबारा गणना कर निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
इस विधिक निर्णय से झारखंड के शिक्षा जगत और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आँकड़ों के मुताबिक, राज्य में वर्तमान में करीब 2,500 ऐसे पारा शिक्षक हैं, जो सीधे तौर पर इस फैसले के दायरे में आएंगे। इसके अतिरिक्त, राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत लगभग 42 हजार संविदा कर्मचारियों के लिए भी हाईकोर्ट का यह फैसला भविष्य में नियमितीकरण और पेंशन लाभ का एक अकाट्य कानूनी आधार बनेगा।







