IGKV Hostel Accident: रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) परिसर से एक बेहद डरावनी और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ विश्वविद्यालय के छात्र छात्रावास (हॉस्टल) के एक कमरे की छत का हिस्सा अचानक भरभरा कर गिर गया। इस हादसे में कमरे के भीतर मौजूद एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसके सिर पर गहरी चोट आई है और अस्पताल में उसे कई टांके लगाने पड़े हैं। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की घोर संवेदनहीनता और विफलता के खिलाफ छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है।
कुलपति की गाड़ी के सामने लेट गए छात्र, जमकर की नारेबाजी
इस गंभीर हादसे के विरोध में ‘भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन’ (NSUI) के प्रदेश सचिव महताब हुसैन के नेतृत्व में सैकड़ों छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में जोरदार धावा बोल दिया। आक्रोशित छात्रों ने न केवल प्रशासनिक भवन का घेराव किया, बल्कि वे विश्वविद्यालय के कुलपति (Vice Chancellor) की गाड़ी के सामने सड़क पर लेट गए। छात्रों ने कुलपति की गाड़ी को आगे बढ़ने से रोक दिया और विश्वविद्यालय प्रशासन तथा इंजीनियरिंग विंग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों और छात्रों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
‘जर्जर कमरे में मरने से बेहतर, कुलपति गाड़ी चढ़ा दें’
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एनएसयूआई के प्रदेश सचिव महताब हुसैन ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए एक बेहद तीखा और प्रतीकात्मक बयान दिया। उन्होंने कहा, “अगर हमारी किस्मत में इस विश्वविद्यालय में आकर मरना ही लिखा है, तो हॉस्टल के इस जर्जर कमरे की छत के नीचे दबकर गुमनामी की मौत मरने से कहीं बेहतर है कि कुलपति अपनी गाड़ी हम छात्रों के ऊपर चढ़ा दें। कम से कम पूरे छत्तीसगढ़ को यह तो साफ-साफ पता चलेगा कि छात्रों की जान की कोई कीमत न समझने वाला यह प्रशासन किस हद तक संवेदनहीन और क्रूर हो चुका है।”
बजट उपयोग की जांच और स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट की मांग
NSUI का आरोप है कि हॉस्टल की बदहाली और छतों से पानी टपकने को लेकर छात्रों द्वारा बार-बार लिखित शिकायतें दी गई थीं, लेकिन मोटी तनख्वाह लेने वाले अधिकारियों ने इसे लगातार नजरअंदाज किया। छात्र संगठन ने प्रशासन के सामने प्रमुख रूप से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
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छात्रावासों की मरम्मत और रखरखाव के लिए स्वीकृत बजट, उसके वास्तविक उपयोग और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए।
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इस घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार छात्र कल्याण अधिष्ठाता (DSW), इंजीनियरिंग शाखा के मुख्य अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से उनके पद से बर्खास्त किया जाए।
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प्रदेश के सभी सरकारी विश्वविद्यालय के छात्रावासों का एक स्वतंत्र विधिक सुरक्षा ऑडिट (Safety Audit) कराया जाए ताकि भविष्य में किसी छात्र की जान न जाए।
एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते दोषियों पर दंडात्मक विभागीय व कानूनी कार्रवाई नहीं की गई और हॉस्टलों की जर्जर स्थिति को नहीं सुधारा गया, तो यह स्थानीय विरोध आने वाले दिनों में पूरे छत्तीसगढ़ में एक व्यापक और उग्र जनआंदोलन का रूप ले लेगा।







