Wednesday, August 19, 2026
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Nakti Encroachment: नकटी में बुलडोजर चलने के बाद धरसीवां के कई गांवों में खौफ, आशियाना छिनने का डर

Nakti Encroachment: मोहम्मद याकुब/धरसीवां/रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र धरसीवां के अंतर्गत आने वाले बहुचर्चित ग्राम नकटी में पिछले दिनों हुई प्रशासन की बड़ी बुलडोजर कार्रवाई का असर अब पूरे इलाके में दिखने लगा है। नकटी में अवैध कब्जों को ढहाए जाने के बाद, धरसीवां क्षेत्र के दर्जनों अन्य गांवों में शासकीय भूमि (सरकारी जमीन) पर मकान बनाकर रह रहे परिवारों के बीच डर और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। इन कब्जाधारियों को अब यह चिंता सता रही है कि यदि भविष्य में शासन को किसी विकास योजना के लिए जमीन की आवश्यकता पड़ी, तो उनके आशियानों पर भी प्रशासन का पीला पंजा चल सकता है। ऐसे में इन परिवारों के सामने रहने के लिए आवास, रोजी-रोटी और बच्चों की पढ़ाई का एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

बिजली, पानी और पीएम आवास भी सरकारी जमीन पर!

चौंकाने वाली बात यह है कि धरसीवां विधानसभा के कई गांवों में शासकीय भूमि पर लोगों ने न सिर्फ कच्चे-पक्के मकान बना लिए हैं, बल्कि वहां वे सालों से गुजर-बसर कर रहे हैं। इन बस्तियों में शासन की मूलभूत सुविधाएं जैसे बिजली, पक्की सड़कें और नल-जल योजना के तहत पानी भी मुहैया कराया जा चुका है। इतना ही नहीं, कई कब्जाधारी ऐसे भी हैं जिनके मकान केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत स्वीकृत राशि से बने हैं।

जब स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों से बात की गई, तो एक बड़ा जमीन घोटाला भी सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के ही कुछ रसूखदार और दलालों द्वारा खाली पड़ी सरकारी जमीन और पशुओं के चारागाह (गौठान/घास जमीन) पर अवैध कब्जा कर, उसे बाहरी सीधे-साधे लोगों को सस्ते दामों पर बेच दिया गया। वहीं, कुछ स्थानीय परिवार ऐसे भी हैं जिनका पुश्तैनी मकानों में जगह कम पड़ने के कारण परिवार बढ़ने पर मजबूरी में गांव की खाली सरकारी जमीन पर मकान बनाना पड़ा।

रिकॉर्ड में जमीन खाली, धरातल पर बस चुकी हैं विशाल बस्तियां

क्षेत्र में राजस्व विभाग (Revenue Department) की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल उठ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों और राजस्व के आधिकारिक रिकॉर्ड में जो शासकीय भूमि पूरी तरह ‘खाली’ दर्ज है, जमीनी हकीकत में वहां बड़ी-बड़ी बस्तियां आबाद हो चुकी हैं। धरसीवां, तिवरइया, गोढ़ी, मोहदी, नागरगांव, परसतराई, सिलयारी और रैता जैसे कई बड़े गांवों में 50 से लेकर 500 परिवार तक अपने मकान बनाकर दशकों से निवासरत हैं।

अब नकटी की कार्रवाई के बाद इन सभी गांवों की धड़कनें बढ़ गई हैं। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि यदि भविष्य में आवश्यकतानुसार प्रशासन इन गांवों में भी अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाता है, तो इतने बड़े पैमाने पर विस्थापित होने वाले गरीब परिवारों के पुनः उत्थान और पुनर्वास के लिए सरकार क्या कदम उठाएगी? यह एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय है, जिस पर प्रशासन को समय रहते नीति बनानी होगी।

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