Ketan Agrawal Murder Case: केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। पुणे के चर्चित रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत के मामले में पुलिस अब वैज्ञानिक जांच के जरिए मजबूत सबूत जुटाने में लगी है। दूसरी ओर, इसी मामले से जुड़ा एक नया कानूनी विवाद भी सामने आया है, जिसमें एक वकील ने मुख्य आरोपी सिया गोयल के भाई को 10 करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस भेजा है। इससे केतन अग्रवाल हत्याकांड एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।
केतन अग्रवाल हत्याकांड में पुलिस का कहना है कि केवल बयानों के आधार पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए अदालत में मजबूत पक्ष रखा जाएगा। इसी वजह से जांच टीम आरोपी चेतन चौधरी का ‘गेट एनालिसिस’ कराने की तैयारी कर रही है। इस प्रक्रिया में आरोपी की चाल, शरीर की मुद्रा और चलने के तरीके का विश्लेषण कर उसकी तुलना घटनास्थल के CCTV फुटेज में दिखाई देने वाले संदिग्ध व्यक्ति से की जाएगी।
हुडी और मास्क वाले शख्स की होगी पहचान
केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल के CCTV में एक ऐसा व्यक्ति दिखाई दिया, जिसने हुडी और मास्क पहन रखा था। चेहरा साफ नजर नहीं आने के कारण उसकी पहचान मुश्किल हो गई। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि चाल-ढाल का मिलान सफल रहता है, तो यह अदालत में एक महत्वपूर्ण फॉरेंसिक साक्ष्य बन सकता है।
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हिरासत बढ़ने के बाद जांच तेज
केतन अग्रवाल हत्याकांड में अदालत ने मुख्य आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि इस दौरान कई तकनीकी जांच पूरी की जानी हैं। इसके अलावा घटनास्थल से जुड़े डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों का भी परीक्षण किया जा रहा है, ताकि पूरी घटना की कड़ियां स्पष्ट हो सकें।
कोर्ट के बाहर शुरू हुआ नया विवाद
केतन अग्रवाल हत्याकांड अब केवल हत्या की जांच तक सीमित नहीं रह गया है। इस मामले में अधिवक्ता आशुतोष श्रीवास्तव ने सिया गोयल के भाई साहिल गोयल को 10 करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि उनके खिलाफ झूठे और मानहानिकारक बयान देकर उनकी पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचाया गया।
माफी और लिखित आश्वासन की मांग
केतन अग्रवाल हत्याकांड से जुड़े इस कानूनी नोटिस में केवल आर्थिक हर्जाने की मांग ही नहीं की गई है, बल्कि सार्वजनिक माफी और भविष्य में ऐसे आरोप दोबारा न लगाने का लिखित आश्वासन भी मांगा गया है। अब इस नोटिस पर क्या जवाब दिया जाता है, इस पर कानूनी विशेषज्ञों और मामले से जुड़े लोगों की नजर बनी हुई है।
वैज्ञानिक सबूत क्यों हैं अहम?
केतन अग्रवाल हत्याकांड में विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकें कई मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यदि CCTV में दिखाई देने वाले व्यक्ति की चाल और आरोपी की चाल का वैज्ञानिक मिलान होता है, तो यह जांच को नई दिशा दे सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय अदालत उपलब्ध सभी साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही करेगी।
आगे क्या?
केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच अभी जारी है। पुलिस वैज्ञानिक जांच, डिजिटल साक्ष्य और गवाहों के बयानों के आधार पर अपनी जांच पूरी कर रही है। वहीं, मानहानि नोटिस से जुड़ा विवाद अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा। दोनों मामलों में अंतिम निष्कर्ष अदालत की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।







