Saturday, August 15, 2026
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CG हाई कोर्ट का बड़ा फैसला! आपसी सहमति से बने संबंध को नहीं माना रेप, पीड़िता की अपील खारिज

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CG NEWS
Bilaspur High Court

Chhattisgarh High Court Verdict: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट फैसला एक बार फिर चर्चा में है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुष्कर्म से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए आरोपी को ट्रायल कोर्ट से मिली बरी को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि यदि कोई बालिग महिला किसी संबंध के परिणामों को समझते हुए उसमें शामिल होती है, तो उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसे सहमति माना जा सकता है। यह फैसला मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर दिया गया है।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट फैसला सरगुजा जिले के अंबिकापुर क्षेत्र से जुड़े एक मामले पर आया है। शिकायत के अनुसार, 15 जून 2018 की रात एक 40 वर्षीय महिला ने आरोप लगाया था कि शौचालय से लौटते समय आरोपी ने उसे धमकाया, मारपीट की और दुष्कर्म किया। मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई थी।

ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को किया था बरी
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट फैसला आने से पहले फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 28 जनवरी को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। इस फैसले से असंतुष्ट होकर पीड़िता ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी और ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।
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हाईकोर्ट ने किन आधारों पर दिया फैसला?
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल और न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की खंडपीठ ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का विस्तार से परीक्षण किया। अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच घटना के दौरान बातचीत हुई थी और उपलब्ध सामग्री से संबंध आपसी सहमति से बने प्रतीत होते हैं। इसी आधार पर अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट फैसला में सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2013 के Kaini Rajan vs State of Kerala मामले का भी उल्लेख किया गया। अदालत ने कहा कि सहमति का अर्थ केवल चुप रहना या विरोध न करना नहीं है, बल्कि यह परिस्थितियों को समझकर लिया गया स्वतंत्र निर्णय भी हो सकता है।

मेडिकल रिपोर्ट पर भी अदालत की टिप्पणी
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट फैसला में मेडिकल रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया। अदालत ने कहा कि डॉक्टर की रिपोर्ट में दुष्कर्म की स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई और दर्ज चोटें भी कथित घटना के समय से मेल नहीं खाती थीं। अदालत ने इसे भी अपने निर्णय में महत्वपूर्ण माना।

हर मामले के तथ्य अलग होते हैं
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट फैसला यह स्पष्ट करता है कि न्यायालय प्रत्येक मामले का निर्णय उसके अपने तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर करता है। किसी एक फैसले को सभी मामलों पर समान रूप से लागू नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में जांच, मेडिकल साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य प्रमाण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

क्या है इस फैसले का महत्व?
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें अदालत ने सहमति की कानूनी अवधारणा पर विस्तार से टिप्पणी की है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में अदालत केवल आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि प्रस्तुत साक्ष्यों और कानून के अनुसार ही निर्णय देती है।

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