ADR Report 2026: हैदराबाद। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच ने देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा के माननीय सांसदों की पृष्ठभूमि को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और विस्तृत रिपोर्ट जारी की है. इस संयुक्त रिपोर्ट में वर्तमान राज्यसभा के कुल 233 सांसदों में से 226 के चुनावी हलफनामों का गहन विश्लेषण किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में पश्चिम बंगाल की चार सीटें रिक्त हैं, जबकि तीन सांसदों के हलफनामे उपलब्ध न होने के कारण उन्हें विश्लेषण में शामिल नहीं किया जा सका. इस डेटा में हाल ही में जून 2026 में संपन्न हुए राज्यसभा चुनावों के 27 नवनिर्वाचित सांसदों के विवरण को भी समाहित किया गया है.
अरबपतियों की भरमार: बीआरएस के सांसद सबसे अमीर, डॉ. बंदी पार्थ सारधी शीर्ष पर
रिपोर्ट से साफ है कि देश के उच्च सदन में धनबल का भारी बोलबाला है. राज्यसभा के 14 प्रतिशत यानी कुल 31 सांसद ‘अरबपति’ हैं, जिनकी व्यक्तिगत संपत्ति 100 करोड़ रुपये से अधिक है. पूरे सदन के सांसदों की औसत संपत्ति का मूल्यांकन किया जाए तो प्रति सांसद औसत दौलत ₹115.25 करोड़ आंकी गई है. राजनीतिक दलों में बीआरएस (BRS) के सांसदों की औसत संपत्ति सबसे अधिक ₹1,841.39 करोड़ है, जबकि द्रमुक (DMK) के सांसदों की औसत संपत्ति सबसे कम ₹11.90 करोड़ प्रति सांसद है.
| सबसे अमीर टॉप 3 राज्यसभा सांसद | पार्टी | राज्य | कुल संपत्ति (रुपये में) |
| 1. डॉ. बंदी पार्थ सारधी | BRS | तेलंगाना | ₹5,300 करोड़+ ($53,00,21,49,910) |
| 2. राजिंदर गुप्ता | BJP | पंजाब | ₹5,053 करोड़+ ($50,53,04,58,711) |
| 3. डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी | INC | तेलंगाना | ₹2,558 करोड़+ ($25,58,24,05,863) |
इसके विपरीत, देश के सबसे कम संपत्ति वाले सांसदों में आम आदमी पार्टी के पंजाब से सांसद संत बलबीर सिंह शीर्ष पर हैं, जिनकी कुल संपत्ति मात्र ₹3.79 लाख है. सदन के सभी 226 सांसदों की कुल संपत्ति को जोड़ दिया जाए, तो यह ₹26,047 करोड़ से अधिक की विशाल राष्ट्रीय राशि बनती है.
दागदार माननीय: 36 सांसदों पर दर्ज हैं हत्या और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर मामले
एडीआर की रिपोर्ट देश के सबसे प्रतिष्ठित सदन में बैठे जनप्रतिनिधियों के आपराधिक रिकॉर्ड की एक चिंताजनक तस्वीर पेश करती है. विश्लेषण किए गए 226 सांसदों में से 69 सांसदों (31 प्रतिशत) ने स्वयं पर आपराधिक मामले दर्ज होने की सार्वजनिक घोषणा की है. इनमें से 16 प्रतिशत यानी 36 सांसद ऐसे हैं, जिन पर बेहद गंभीर आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं. अपराधों की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सदन के 1 सांसद पर हत्या (IPC की धारा 302) और 4 सांसदों पर हत्या के प्रयास (IPC की धारा 307) का मामला दर्ज है. इसके अतिरिक्त, 4 सांसदों ने हलफनामे में महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े मामलों को स्वीकार किया है.
पार्टी-वार विश्लेषण को देखें तो कई प्रमुख दलों के आधे या उससे अधिक सांसद दागी श्रेणी में आते हैं. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 107 में से 28 सांसदों (26%) और कांग्रेस के 29 में से 12 सांसदों (41%) पर आपराधिक मामले हैं. वहीं, भारत राष्ट्र समिति (BRS) और सीपीआई(एम) (CPM) का रिकॉर्ड सबसे खराब रहा है, जिनके शत-प्रतिशत (100%) सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं. गंभीर आपराधिक मामलों की श्रेणी में भाजपा के 14 (13%) और कांग्रेस के 8 (28%) सांसद शामिल हैं. राज्यों की दृष्टि से तेलंगाना (71%) और दिल्ली (67%) के राज्यसभा सांसद आपराधिक रिकॉर्ड के मामले में सबसे आगे हैं.
शिक्षा और आयु के आंकड़े: 81% सांसद ग्रेजुएट, लेकिन महिलाओं की हिस्सेदारी अब भी बेहद कम
सदन के शैक्षणिक और जनसांख्यिकीय ढांचे की बात करें तो राज्यसभा इस मामले में काफी परिपक्व दिखाई देती है. विश्लेषण में सामने आया कि 81% यानी 182 सांसद स्नातक (Graduate) या उससे अधिक की उच्च शैक्षणिक योग्यता रखते हैं. इसके विपरीत, 16% (36 सांसद) ऐसे भी हैं जो 5वीं से 12वीं कक्षा के बीच पढ़े-लिखे हैं. 7 सांसदों के पास विशिष्ट डिप्लोमा है, जबकि 1 सांसद ने स्वयं को केवल साक्षर बताया है.
आयु वर्ग के लिहाज से, उच्च सदन में परिपक्व राजनेताओं का दबदबा है. सर्वाधिक 53% (120 सांसद) 41 से 60 वर्ष की आयु के हैं, जबकि 40% (91 सांसद) 61 से 80 वर्ष के बुजुर्गों की श्रेणी में आते हैं. 31 से 40 वर्ष के युवा सांसदों की संख्या केवल 5% (12 सांसद) है. हालांकि, आधी आबादी के प्रतिनिधित्व के मामले में उच्च सदन का रिकॉर्ड अब भी निराशाजनक है, क्योंकि कुल 226 सांसदों में से केवल 34 महिला सांसद (महज 15%) ही देश के इस नीति-निर्धारक सदन में मौजूद हैं.







