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Lailunga Hospital Crisis: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में धूल फांक रही लाखों की सोनोग्राफी मशीन, डॉक्टरों की कमी से मरीज बेहाल

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Lailunga Hospital Crisis: गौरी शंकर गुप्ता/लैलूंगा। रायगढ़ जिले के विकासखंड मुख्यालय लैलूंगा का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वर्षों से बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का दंश झेल रहा है। इस सरकारी अस्पताल में लाखों रुपये की सरकारी लागत से स्थापित की गई आधुनिक सोनोग्राफी मशीन डॉक्टर और रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में वर्षों से बेकार (निष्प्रयोज्य) पड़ी हुई है। जमीनी हालत यह है कि गरीब मरीजों की सुविधा के लिए करोड़ों की अधोसंरचना के बीच लगाई गई यह मशीन अब केवल अस्पताल के एक बंद कमरे की शोभा बनकर रह गई है और धीरे-धीरे जंग खाने को मजबूर हो रही है।

नेताओं ने सेंकी राजनीतिक रोटियां, पर नहीं मिला स्थायी समाधान

क्षेत्रवासियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय सोनोग्राफी मशीन की सुविधा दिलाने को लेकर नेताओं ने खूब राजनीतिक रोटियां सेंकी, लेकिन अब डॉक्टर की कमी पर सबने चुप्पी साधी हुई है। कुछ समय पूर्व सप्ताह में एक-दो दिन के लिए यहाँ सोनोग्राफी विशेषज्ञ की वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी, जिससे मरीजों को थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन वह व्यवस्था भी प्रशासनिक लापरवाही के कारण अधिक समय तक नहीं चल सकी।

जांच के लिए 90 से 150 किलोमीटर का सफर तय करने की मजबूरी

लैलूंगा अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा पूरी तरह ठप होने के कारण मरीजों को छोटी सी जांच के लिए भी मजबूरन जिला मुख्यालय रायगढ़ जाना पड़ता है। लैलूंगा मुख्यालय से रायगढ़ शहर की दूरी लगभग 90 से 95 किलोमीटर है। वहीं, इस विकासखंड के सुदूर व वनांचल गांवों से आने वाले मरीजों को पहले लैलूंगा और फिर वहां से रायगढ़ तक का लंबा सफर तय करना पड़ता है। इसके कारण कई बार यह दूरी 150 किलोमीटर से भी अधिक हो जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर आदिवासी परिवारों के लिए यह अतिरिक्त किराया और खर्च किसी बड़ी मानसिक व आर्थिक चुनौती से कम नहीं है।

गर्भवती महिलाओं और अजन्मे शिशुओं के स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा

सोनोग्राफी सुविधा बंद होने का सबसे घातक और सीधा असर क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर शिशु की स्थिति जानने के लिए सोनोग्राफी जांच अनिवार्य होती है। स्थानीय स्तर पर यह सुविधा न होने से महिलाओं को बसों और अन्य साधनों में हिचकोले खाते हुए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। कई बार खराब आर्थिक स्थिति और परिवहन के साधनों की कमी के कारण जांच में महीनों की देरी हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, समय पर जांच न होने से जच्चा और बच्चा (गर्भस्थ शिशु) दोनों के स्वास्थ्य पर हर वक्त बड़ा खतरा मंडराता रहता है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी भारी कमी, अंबिकापुर का रुख कर रहे लोग

लैलूंगा के इस मुख्य अस्पताल में केवल सोनोग्राफी विशेषज्ञ का ही अभाव नहीं है, बल्कि स्त्री रोग विशेषज्ञ और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद भी लंबे समय से खाली पड़े हैं। क्षेत्र की एक बहुत बड़ी ग्रामीण आबादी पूरी तरह से इसी शासकीय अस्पताल पर निर्भर है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की पदस्थापना न होने से गंभीर मरीजों को रायगढ़ के अलावा पड़ोसी जिले अंबिकापुर या फिर निजी नर्सिंग होम की शरण लेनी पड़ती है, जहाँ उनसे मोटी रकम वसूली जाती है।

कागजी दावों के घेरे में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था

एक ओर सरकार ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में बेहतर और हाईटेक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे करती है। वहीं दूसरी ओर, लैलूंगा जैसे महत्वपूर्ण विकासखंड मुख्यालय में लाखों रुपये की सोनोग्राफी मशीन वर्षों से उपयोग के इंतजार में कबाड़ हो रही है। क्षेत्र के सजग नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि लैलूंगा अस्पताल में तत्काल नियमित सोनोग्राफी विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की पदस्थापना सुनिश्चित की जाए, ताकि जनता को बुनियादी इलाज के लिए भटकना न पड़े।

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VIKASH KHALKHO
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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।

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