Rafale Controversy: भारत और पाकिस्तान के बीच मई में हुए तनाव के बाद शुरू हुआ राफेल विमान विवाद अब फिर सुर्खियों में आ गया है। भारतीय वायुसेना के एक दस्तावेज के सामने आने के बाद इस राफेल विमान विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। दस्तावेज के आधार पर दावा किया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना का कोई भी राफेल विमान नुकसान का शिकार नहीं हुआ।
पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। इसी दौरान पाकिस्तान की तरफ से दावा किया गया था कि उसने भारतीय राफेल लड़ाकू विमानों को निशाना बनाया है। हालांकि उस समय भारत की ओर से ऐसे दावों को खारिज किया गया था।बाद में राफेल विमान विवाद तब और चर्चा में आया जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार से सवाल पूछते हुए कहा था कि देश को बताया जाए कि संघर्ष के दौरान कितने राफेल विमान गिरे।
वायुसेना के दस्तावेज ने क्या बताया?
अब सामने आए दस्तावेज ने राफेल विमान विवाद को नया मोड़ दे दिया है। भारतीय वायुसेना के आधिकारिक रिकॉर्ड में बताया गया है कि उसके पास कुल 36 राफेल लड़ाकू विमान हैं और सभी विमानों के लिए तकनीकी सहायता की योजना बनाई गई है।दस्तावेज में कहीं भी किसी राफेल विमान के नुकसान या गिराए जाने का उल्लेख नहीं है। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में इस राफेल विमान विवाद पर नई बहस शुरू हो गई है।
BJP ने राहुल गांधी को घेरा
दस्तावेज सामने आने के बाद बीजेपी ने राफेल विमान विवाद को लेकर राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। पार्टी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि अब यह साफ हो गया है कि पाकिस्तान के दावे सही नहीं थे।उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने बिना पुष्टि के ऐसे सवाल उठाकर पाकिस्तान के नैरेटिव को ताकत देने का काम किया। बीजेपी का कहना है कि राफेल विमान विवाद पर दिए गए बयान के लिए राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए।
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राहुल गांधी के सवाल क्यों बने चर्चा का विषय?
जब भारत-पाकिस्तान तनाव चरम पर था, तब राहुल गांधी ने सरकार से पारदर्शिता की मांग की थी। उनका कहना था कि देश को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलनी चाहिए।हालांकि अब राफेल विमान विवाद से जुड़े नए दस्तावेज सामने आने के बाद बीजेपी इस मुद्दे को कांग्रेस के खिलाफ राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है।
पाकिस्तान के दावों पर फिर उठे सवाल
नए तथ्यों के सामने आने के बाद पाकिस्तान के उन दावों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं जिनमें उसने राफेल विमानों को नुकसान पहुंचाने की बात कही थी। विशेषज्ञों का मानना है कि राफेल विमान विवाद से जुड़े कई दावे समय के साथ खुद ही कमजोर पड़ते दिखाई दिए।अब दस्तावेज के सार्वजनिक होने के बाद पाकिस्तान के दावों की विश्वसनीयता पर फिर बहस शुरू हो गई है।
आगे क्या होगा?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राफेल विमान विवाद आने वाले दिनों में संसद और चुनावी मंचों पर भी सुनाई दे सकता है। एक तरफ बीजेपी इसे राष्ट्र सुरक्षा से जोड़ रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष सरकार से अधिक जानकारी साझा करने की मांग कर सकता है।फिलहाल इतना तय है कि वायुसेना के दस्तावेज के सामने आने के बाद राफेल विमान विवाद ने देश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।









