Chhattisgarh Farmers: मुंगेली। मुंगेली जिले के चातरखार ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम बाघामुड़ा में कुदरत का कहर बरपा है। पिछले सप्ताह अचानक हुई तेज आंधी और मूसलाधार बारिश से केले की खड़ी फसल पूरी तरह तबाह हो गई है। यहाँ के स्थानीय कृषक राजेश तिवारी, मृत्युंजय तिवारी और आरती तिवारी के फार्म हाउस में भारी तबाही हुई है। उनके 3 एकड़ रकबे में लगे लगभग 3000 केले के पौधे तेज हवाओं के कारण उखड़कर जमीन पर गिर गए। दुखद बात यह है कि यह फसल बाजार में बेचने के लिए लगभग पूरी तरह तैयार थी।
फसल बर्बाद होने से गहरे सदमे में है पीड़ित किसान परिवार
केले की तैयार फसल पूरी तरह बर्बाद होने से किसान परिवार के मुखिया राजेश तिवारी गहरे सदमे में आ गए हैं। पीड़ित किसान ने रोते हुए बताया कि उन्होंने इस बार खेती के लिए बैंक और अन्य स्रोतों से लाखों रुपये का कर्ज लिया था। उनकी पूरी उम्मीद इसी केले की फसल पर टिकी हुई थी। हालांकि, अब फसल नष्ट होने के बाद उन्हें परिवार चलाने और कर्ज चुकाने की भारी चिंता सता रही है। इस प्राकृतिक आपदा ने किसान के सामने जीविकोपार्जन का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
बाजार में बेचने के लिए तैयार थी 20 लाख की फसल
किसान राजेश तिवारी और उनके साथियों की मेहनत पर पानी फिर गया है। किसानों के अनुसार इस बार बाजार में केले के बहुत अच्छे दाम मिलने की पूरी संभावना थी। फसल कटाई के लिए तैयार हो चुकी थी और स्थानीय मंडियों में इसकी भारी मांग भी बनी हुई थी। किसानों ने जानकारी दी कि इस खेती में उनकी करीब 4 से 5 लाख रुपये की नकद लागत लगी थी। आंधी और तूफान के कारण अब करीब 15 से 20 लाख रुपये की तैयार फसल का अनुमानित नुकसान हुआ है।
कुंभकरणीय नींद में सोया जिला प्रशासन, नहीं हुआ सर्वे
किसान परिवार ने स्थानीय प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि केले की फसल का लाखों रुपये का नुकसान होने के बावजूद जिला प्रशासन कुंभकरणीय नींद में सोया हुआ है। घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी अब तक कोई राजस्व अधिकारी या प्रशासनिक अमला मौके पर मुआयना करने नहीं पहुंचा है। शासन की इस अनदेखी और लापरवाही के कारण प्रभावित किसानों में भारी आक्रोश और निराशा देखी जा रही है।
प्रभावित किसानों ने की उचित मुआवजे की मांग
अंततः, प्रभावित किसान परिवार ने जिला प्रशासन से जल्द से जल्द मौका मुआयना और सर्वे कराने की मांग की है। उन्होंने सरकार से नुकसान का सही आकलन कर उचित मुआवजा देने की पुरजोर गुहार लगाई है। पीड़ित किसानों का कहना है कि यदि उन्हें समय पर सरकारी सहायता नहीं मिली, तो उन पर कर्ज का बोझ और अधिक बढ़ जाएगा। परिणामस्वरूप, पूरा परिवार एक गहरे आर्थिक संकट में फंस जाएगा, जिससे उबरना उनके लिए नामुमकिन होगा।








