Korba Forest Department: बाघ या तेंदुआ? मवेशियों के लगातार शिकार से पसरा सन्नाटा, वन विभाग ने निगरानी के लिए लगाए थर्मल कैमरे

VIKASH KHALKHO

Korba Forest Department: कोरबा। छत्तीसगढ़ के ऊर्जाधानी जिला कोरबा के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में इन दिनों एक हिंसक वन्यप्राणी की आमद से भारी दहशत का माहौल है। पिछले दो दिनों के भीतर अज्ञात हिंसक जीव ने अलग-अलग वन परिक्षेत्रों में घुसकर एक बैल और एक भैंस को अपना निवाला बना लिया है। लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद वन विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) प्रेमलता यादव के कड़े निर्देश पर प्रभावित इलाकों और घटनास्थल के आसपास थर्मल कैमरे (Thermal Cameras) स्थापित कर चौबीसों घंटे निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि हमलावर वन्यप्राणी के तेंदुआ या बाघ होने की आधिकारिक पुष्टि की जा सके।

कटंग नाला के पास मिला बैल का क्षत-विक्षत शव प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन्यप्राणी के हमले की पहली घटना 27 मई को पसरखेत वन परिक्षेत्र के अंतर्गत कोलगा परिसर में सामने आई। यहाँ के कर्रानारा बस्ती निवासी किसान आमासो उरांव का बैल रोजाना की तरह सुबह चरने के लिए जंगल गया हुआ था। शाम को जब केवल एक ही बैल वापस लौटा, तो परिजनों को चिंता हुई। खोजबीन करने पर कटंग नाला के समीप दूसरे बैल का शव क्षत-विक्षत हालत में बरामद हुआ। बैल के शरीर पर हिंसक पशु के दांतों और पंजों के गहरे निशान थे। सूचना मिलते ही वन अमले ने मौके पर पहुंचकर पदचिह्नों (पगमार्क) की जांच की, जिसे प्राथमिक तौर पर तेंदुए का होना बताया जा रहा है।

फिटकपारा में भैंस का शिकार, ग्रामीणों में बाघ होने की आशंका अभी इस घटना को तीन दिन ही बीते थे कि 30 मई को कोरबा वन परिक्षेत्र के कोरकोमा सर्किल में दूसरी वारदात हो गई। यहाँ दुहन सिंह राठिया की पालतू भैंस जंगल से वापस नहीं लौटी। काफी तलाश करने के बाद फिटकपारा के पास स्थित एक राइस मिल से दूर जंगल की गहरी खाई में भैंस मृत अवस्था में पाई गई। भैंस के शरीर पर भी वन्यजीव के हमले के स्पष्ट साक्ष्य मिले हैं। लगातार दो बड़े मवेशियों के शिकार के बाद ग्रामीणों में कयासों और डर का माहौल है। कुछ ग्रामीणों का दावा है कि हमलावर कोई तेंदुआ नहीं बल्कि बाघ है, क्योंकि तेंदुआ आमतौर पर भैंस जैसे भारी-भरकम मवेशी पर लगातार हमला कर उसका शिकार नहीं कर सकता।

मुआवजे की प्रक्रिया पूरी, जंगल न जाने की अपील वन विभाग ने दोनों ही मामलों को बेहद गंभीरता से लेते हुए त्वरित वैधानिक कार्रवाई की है। पशु चिकित्सकों की टीम से मृत मवेशियों का पोस्टमार्टम (पीएम) कराकर प्रभावित पशुपालक किसानों को तात्कालिक सहायता और मुआवजा राशि देने की कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। एसडीओ (दक्षिण) सूर्यकांत सोनी और एसडीओ (उत्तर) के संयुक्त मार्गदर्शन में वनकर्मी लगातार जंगलों में गश्त कर रहे हैं। हिंसक वन्यजीव की मौजूदगी के कारण ग्रामीणों ने तेंदूपत्ता और अन्य वनोपज संग्रहण के लिए जंगल के भीतर जाना बंद कर दिया है। वन विभाग ने मुनादी कराकर ग्रामीणों से अकेले गहरे जंगल में न जाने और किसी भी संदिग्ध हलचल या पगमार्क दिखने पर तुरंत आबकारी या वन विभाग को सूचित करने की अपील की है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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