Tuesday, September 1, 2026
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Khandwa Municipal Corporation: खंडवा नगर निगम की समीक्षा बैठक से गरमाई सियासत, विधायक और महापौर के बीच खींचतान आई सामने

Khandwa Municipal Corporation: खंडवा: नगर पालिक निगम की समीक्षा बैठक के बाद शहर की राजनीति एक बार फिर पूरी तरह गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी की विधायक कंचन मुकेश तनवे द्वारा नगर निगम के विकास कार्यों की समीक्षा किए जाने को लेकर अब सियासी बयानबाजी तेज हो चुकी है। इस घटनाक्रम से साफ दिखाई देने लगा है कि भारतीय जनता पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कलेक्टर सभाकक्ष में हुई इस बैठक में पहली बार किसी विधायक ने अपनी ही पार्टी की परिषद की समीक्षा बैठक बुलाई। इस दौरान जेठानी चारूलता यादव ने सांसद प्रतिनिधि बनकर देवरानी महापौर अमृता यादव और अफसरों से सीधे तीखे सवाल पूछे।

विधायक और महापौर में खींचतान

बैठक में महापौर अमृता अमर यादव ने निगम परिषद द्वारा कराए गए विकास कार्यों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। इसके विपरीत, विधायक और महापौर के बीच पुरानी खींचतान भी अब खुलकर चर्चाओं में आ गई है। इससे पहले चर्बी, चमड़ा, सींग और हड्डी मिलने वाले मामले में दोनों ने अलग हटकर अपना पक्ष रखा था। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेट्रोल-डीजल बचाने के आह्वान पर भी दोनों में प्रतिस्पर्धा दिखी थी। तब विधायक सायकल पर तो महापौर ई-कार का प्रचार करती दिखाई दी थीं। हालांकि, विधायक ने मीडिया के सामने अपने और महापौर के बीच सब चंगा होने का दावा किया है।

महापौर ने गिनाईं उपलब्धियां

दूसरी ओर, महापौर अमृता अमर यादव ने नगर निगम परिषद द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों को जोर-शोर से गिनाया। उन्होंने अपने रिपोर्ट कार्ड को लेकर दो टूक शब्दों में कहा कि उनका रिपोर्ट कार्ड संगठन तय करेगा। इसके साथ ही उन्होंने शहर की बहुप्रतीक्षित सीवरेज परियोजना, नर्मदा जल योजना और ट्रांसपोर्ट नगर परियोजना को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। अवैध गतिविधियों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों का संज्ञान लेकर नगर निगम और प्रशासन की टीम ने मौके पर जाकर कड़ी कार्रवाई की थी।

कांग्रेस ने बोला तीखा हमला

इधर कांग्रेस ने इस पूरे मामले को भाजपा के अंदरूनी विवाद और वर्चस्व की लड़ाई से जोड़ते हुए बड़ा हमला बोला है। नेता प्रतिपक्ष दीपक मुल्लू राठौर ने आरोप लगाया कि समीक्षा बैठक में उन्हें और विपक्ष के पार्षदों को आमंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताते हुए विधायक और महापौर के बीच कमीशन की लड़ाई के आरोप भी लगाए। अंततः, नगर निगम की इस बैठक ने भाजपा के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान को जनता के सामने लाकर खड़ा कर दिया है।

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