Saturday, August 22, 2026
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Mauganj Flyover Demand: कागजों में विकास पर जमीन पर सिर्फ हादसे; मऊगंज में अब फ्लाईओवर के लिए उठी आवाज!

मऊगंज। नवगठित मऊगंज जिले के कलेक्ट्रेट के ठीक पास स्थित NH-135 का वारांव मोड़ चौराहा अब लोगों के लिए दहशत का पर्याय बन चुका है। इस रास्ते पर आए दिन होने वाले दर्दनाक सड़क हादसों ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। तेज रफ्तार वाहनों की आपसी टक्कर, अनियंत्रित ट्रैफिक और सुरक्षा इंतजामों की भारी कमी के चलते यह चौराहा अब “ब्लैक स्पॉट” के रूप में बदनाम है। स्थानीय निवासियों का साफ कहना है कि यहाँ से गुजरना सीधे अपनी जान को जोखिम में डालने जैसा है।

तीन साल में उजड़ गए दर्जनों परिवार

इस गंभीर मुद्दे को लेकर समाजसेवी और इंजीनियर विनीत मिश्रा ने स्थानीय प्रशासन को झकझोरने का प्रयास किया है। उन्होंने जिला कलेक्टर को एक विस्तृत आवेदन सौंपते हुए बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। उनके मुताबिक, बीते तीन वर्षों में वारांव मोड़ पर करीब 30 से 40 लोगों की अकाल और दर्दनाक मौत हो चुकी है। इसके अलावा, छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं तो यहाँ हर दिन की आम बात बन चुकी हैं। इन हादसों में कई हंसते-खेलते परिवार पूरी तरह उजड़ गए, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार लोक निर्माण और एनएचएआई विभाग अब तक गहरी नींद में सोया हुआ है।

प्रशासनिक दफ्तरों के पास भारी दबाव

यह व्यस्त चौराहा असल में मऊगंज कलेक्ट्रेट, प्रमुख प्रशासनिक कार्यालयों, हेलीपैड और ग्रामीण संपर्क मार्गों को आपस में जोड़ने वाला मुख्य केंद्र बिंदु है।

यही कारण है कि यहाँ दिनभर भारी और कमर्शियल वाहनों का जबरदस्त दबाव बना रहता है। तेज रफ्तार ट्रक, डंपर और बसें अचानक इस कटिंग से बेहद लापरवाही के साथ निकलते हैं। परिणामस्वरूप, स्थानीय बाइक चालकों और राहगीरों की जान हमेशा खतरे में फंसी रहती है। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि यहाँ सुरक्षा के नाम पर कोई भी पुख्ता इंतजाम दिखाई नहीं देता है। कलेक्ट्रेट के पास होने के बाद भी न तो यहाँ ट्रैफिक सिग्नल चलते हैं, और न ही पर्याप्त स्ट्रीट लाइटिंग की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही, यहाँ न तो रिफ्लेक्टर लगे हैं और न ही कोई चेतावनी साइन बोर्ड लगाया गया है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बयां किया खौफनाक मंजर

इसके अलावा, हादसे के प्रत्यक्षदर्शी और समाजसेवी बेटा खान ने बताया कि इस चौराहे पर बड़े वाहन बिना किसी रोक-टोक के धड़ल्ले से दौड़ते हैं। लापरवाही की वजह से अक्सर लोग इन भारी वाहनों की चपेट में आ जाते हैं। उन्होंने आगे बताया कि कई मौकों पर उन्होंने खुद अपनी गाड़ी से घायलों को नाजुक हालत में अस्पताल पहुँचाया है। अगर प्रशासन ने समय रहते इस चौराहे का कोई स्थायी और ठोस समाधान नहीं निकाला, तो आने वाले दिनों में मौतों का यह भयावह आंकड़ा और ज्यादा डरावना रूप अख्तियार कर सकता है।

 

फ्लाईओवर ही एकमात्र स्थायी समाधान

बढ़ते ट्रैफिक दबाव और लगातार बहते खून को रोकने के लिए समाजसेवी इंजीनियर विनीत मिश्रा ने वारांव मोड़ पर एक आधुनिक फ्लाईओवर निर्माण की मांग को लेकर विस्तृत प्रस्ताव जिला प्रशासन को दिया है।

उनका स्पष्ट तर्क है कि इस खूनी हाईवे पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं को रोकने का अब फ्लाईओवर ही एकमात्र रास्ता बचा है। इससे न केवल बेकसूर लोगों की जान बचेगी, बल्कि पूरे शहर के यातायात को भी बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, अब सबसे बड़ा सवाल मध्य प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के सामने खड़ा है कि आखिर इस मौत के मोड़ पर लोग कब तक अपनी जान गंवाते रहेंगे? क्या सरकार इस गंभीर खतरे को देखते हुए फ्लाईओवर निर्माण को मंजूरी देगी, या फिर हर बड़े हादसे के बाद सिर्फ कागजी जांच और खोखले आश्वासनों का पुराना सिलसिला ही चलता रहेगा?

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