ममता-स्टालिन की गाड़ी को केजरीवाल ने किया पंक्चर! दोनों के समर्थन में उतरे, दोनों ही हारे…

Rahul Goshwami

नई दिल्ली :  पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। इन चुनावों में जहां भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक बढ़त बनाई, वहीं तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी TVK ने बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया।

इन परिणामों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की हो रही है, जिन्होंने दोनों राज्यों में विपक्षी दलों के समर्थन में जोरदार प्रचार अभियान चलाया था।

ममता बनर्जी के समर्थन में उतरे थे केजरीवाल

पश्चिम बंगाल चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पक्ष में कई रैलियां और रोड शो किए थे। 26 और 27 अप्रैल को उन्होंने कोलकाता, हावड़ा और बल्लीगंज समेत कई इलाकों में प्रचार किया।

रैलियों के दौरान केजरीवाल ने केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखे हमले किए। उन्होंने केंद्रीय बलों की तैनाती पर सवाल उठाए और दावा किया कि बंगाल की संस्कृति पर हमला किया जा रहा है।

हालांकि चुनावी रुझानों और अब सामने आते नतीजों से संकेत मिल रहे हैं कि केजरीवाल के प्रचार का TMC को अपेक्षित फायदा नहीं मिला। भाजपा ने इन बयानों को चुनावी मुद्दा बनाते हुए विपक्ष पर “भ्रम फैलाने” का आरोप लगाया।
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तमिलनाडु में भी नहीं चला प्रचार का असर

तमिलनाडु में भी अरविंद केजरीवाल ने डीएमके प्रमुख और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के समर्थन में खुलकर प्रचार किया।

20 अप्रैल 2026 को चेन्नई के पुलियानथोपे इलाके में आयोजित रोड शो में केजरीवाल ने स्टालिन को अपना “भाई” बताया और भाजपा को “विभाजनकारी राजनीति” करने वाला दल कहा। उन्होंने यह भी दावा किया था कि तमिलनाडु की जनता भाजपा को स्वीकार नहीं करेगी।

लेकिन चुनावी तस्वीर ने अलग ही कहानी पेश की। शुरुआती रुझानों में डीएमके पिछड़ती दिखाई दी, जबकि अभिनेता विजय की नई पार्टी TVK ने जबरदस्त प्रदर्शन कर सभी को चौंका दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केजरीवाल का प्रचार तमिलनाडु के मतदाताओं को प्रभावित करने में सफल नहीं हो पाया।

विपक्षी राजनीति पर असर

दो बड़े राज्यों में विपक्षी दलों के कमजोर प्रदर्शन ने राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। अरविंद केजरीवाल पिछले कुछ समय से खुद को राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ एक मजबूत चेहरा बनाने की कोशिश कर रहे थे।

लेकिन बंगाल और तमिलनाडु के नतीजों ने उनकी इस रणनीति को बड़ा झटका दिया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इन चुनावों ने यह साफ कर दिया कि हर राज्य की अपनी स्थानीय राजनीति और मुद्दे होते हैं, जहां बाहरी प्रचार हमेशा असरदार साबित नहीं होता।

BJP और TVK को मिला फायदा

पश्चिम बंगाल में भाजपा ने रिकॉर्ड बढ़त बनाकर सत्ता के करीब पहुंचने के संकेत दिए हैं। वहीं तमिलनाडु में विजय की TVK ने चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल दिए।

इन दोनों राज्यों में विपक्षी दलों के समर्थन में उतरे केजरीवाल की मौजूदगी चर्चा में जरूर रही, लेकिन उसका चुनावी फायदा जमीन पर दिखाई नहीं दिया।

राष्ट्रीय राजनीति के लिए क्या संकेत?

इन चुनावी परिणामों को 2029 लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी राजनीति के लिए अहम संकेत माना जा रहा है। विपक्षी एकता की कोशिशों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या केवल भाजपा विरोधी प्रचार के सहारे चुनावी सफलता हासिल की जा सकती है।

फिलहाल बंगाल और तमिलनाडु के नतीजों ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि क्षेत्रीय राजनीति में स्थानीय नेतृत्व और मुद्दे अब भी सबसे ज्यादा प्रभाव रखते हैं।

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