M.P News : बड़वानी में जल संकट भयावह! 3 किमी दूर से पानी लाने को मजबूर आदिवासी

Rahul Goshwami

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के पाटी विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत पीपरकुंड में पेयजल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है। महाराष्ट्र सीमा से सटे इस आदिवासी क्षेत्र में हालात इतने खराब हैं कि ग्रामीणों को 2 से 3 किलोमीटर दूर से पानी लाकर पीना पड़ रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ स्थिति और बिगड़ती जा रही है।

दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

कुंडिया, कंजानिया और आमली फलिया जैसी बस्तियों में लोग मजबूरी में दूषित पानी का उपयोग कर रहे हैं। यह पानी इतना खराब है कि सामान्य उपयोग के लिए भी उपयुक्त नहीं, फिर भी यही उनके जीवन का सहारा बना हुआ है। जल स्रोत सूखने और जलस्तर गिरने से संकट और गहरा गया है।

पानी लाना बना जोखिम भरा काम

ग्रामीणों के लिए पानी लाना किसी चुनौती से कम नहीं है। कई लोगों को खाई और पथरीले कुओं में उतरकर पानी भरना पड़ता है। फिसलन और गहराई के कारण कई हादसे भी हो चुके हैं। छोटे बच्चे तक कुओं में उतरने को मजबूर हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।

मूलभूत सुविधाओं का अभाव

ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे क्षेत्र में 8 किलोमीटर तक एक भी हैंडपंप नहीं है। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे रोजाना लंबी दूरी तय कर पानी लाते हैं। कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
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हजारों लोग रोजाना प्रभावित

सरपंच किरमाबाई डावर के अनुसार ग्राम पंचायत की कुल आबादी लगभग 8 हजार है, जिसमें से करीब 3 हजार लोग रोजाना पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वर्षों से चली आ रही इस समस्या ने अब विकराल रूप ले लिया है।

प्रशासन के प्रयास और चुनौतियां

पीएचई विभाग का कहना है कि क्षेत्र पहाड़ी होने के कारण बोरवेल मशीनें पहुंचाना मुश्किल है। हालांकि अधिकारियों ने निरीक्षण कर समाधान के प्रयास करने की बात कही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अब भी कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आ रहा।

जल अभावग्रस्त घोषित हुआ जिला

कम वर्षा के चलते जिला प्रशासन ने बड़वानी को जल अभावग्रस्त घोषित कर दिया है। 15 जुलाई तक निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और उपलब्ध जल स्रोतों का उपयोग केवल पेयजल और पशुधन के लिए करने के निर्देश दिए गए हैं।

जमीनी हकीकत बनी चुनौती

प्रशासनिक घोषणाओं और सख्ती के बावजूद पीपरकुंड के ग्रामीण आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह स्थिति न केवल विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है, बल्कि ग्रामीण जीवन की कठोर सच्चाई भी उजागर करती है।

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