Rouse Avenue Court : नई दिल्ली: कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ मतदाता सूची में कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से नाम शामिल कराने के मामले में सोमवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 अप्रैल की तारीख तय की है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से पहले ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वोटर लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराया था।
क्या है पूरा विवाद? वकील विकास त्रिपाठी द्वारा दायर रिवीजन पिटीशन (पुनरीक्षण याचिका) में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल, 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। हालांकि, उनका नाम 1980 की नई दिल्ली की मतदाता सूची में पहले से ही दर्ज था। याचिकाकर्ता का तर्क है कि एक विदेशी नागरिक का नाम भारतीय मतदाता सूची में केवल जालसाजी या गलत घोषणा के जरिए ही शामिल किया जा सकता है। याचिका में इस पूरे मामले की एफआईआर दर्ज कर उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।
अदालत की सख्त टिप्पणी सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से कई तीखे सवाल पूछे। कोर्ट ने कहा कि यह मामला लगभग 50 साल पुराना है, ऐसे में अब एफआईआर और जांच की मांग किस आधार पर की जा रही है? अदालत ने यह भी पूछा कि जांच किस स्तर पर और कैसे संभव होगी। जज ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता द्वारा दी जा रही जानकारी केवल नाम जोड़ने और हटाने की परिस्थितियों तक ही सीमित है।
सोनिया गांधी का पक्ष सोनिया गांधी की ओर से अदालत में पहले ही जवाब दाखिल किया जा चुका है। उनके वकीलों ने इस याचिका को पूरी तरह से ‘तथ्यहीन’ और ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित’ बताया है। बचाव पक्ष का तर्क है कि यह कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। गौरतलब है कि सितंबर 2025 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद यह रिवीजन पिटीशन दायर की गई है।











