Friday, August 21, 2026
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Jaggi murder case : जग्गी हत्याकांड केस रिओपन, 2 CSP, थाना प्रभारी समेत अन्य को हुई थी सजा, क्या बोले अमित जोगी

Jaggi murder case : बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है। करीब दो दशक पुराने इस हाई-प्रोफाइल केस को अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दोबारा खोला गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आज इस मामले की सुनवाई हुई और अब 1 अप्रैल को इस केस की फाइनल हियरिंग तय की गई है। इस बीच, एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी का नाम चर्चा में आ गया है, जिन्हें अब जमानत लेनी पड़ सकती है।”

Jaggi murder case : “बिलासपुर हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट में रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी भी मौजूद रहे। कोर्ट ने मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 1 अप्रैल की तारीख तय कर दी है।

दरअसल, इससे पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच दोषियों की अपील खारिज कर आजीवन कारावास की सजा बरकरार रख चुकी थी। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील स्वीकार करते हुए मामले को दोबारा हाईकोर्ट भेजा है, ताकि पूरे केस की मेरिट पर विस्तार से सुनवाई हो सके।”

“इस हत्याकांड की शुरुआती जांच में पक्षपात के आरोप लगे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने केस सीबीआई को सौंप दिया था। सीबीआई ने अपनी जांच में कई लोगों के साथ-साथ अमित जोगी पर भी हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे।

हालांकि, 2007 में रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। लेकिन अब केस के दोबारा खुलने के बाद कानूनी जानकारों का कहना है कि उन्हें फिर से जमानत लेनी होगी।

रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी का कहना है कि अब अमित जोगी दोबारा आधिकारिक रूप से आरोपी बन गए हैं और 1 अप्रैल को सभी पक्ष कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे।”

“इस पूरे मामले पर अमित जोगी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि उन्हें दो दशक पहले ही बरी किया जा चुका है और वे पूरी शांति और आत्मविश्वास के साथ अदालत का सामना करेंगे।अमित जोगी का कहना है कि ‘सत्य की जीत निश्चित है’ और उन्हें उम्मीद है कि न्याय मिलेगा।”

“रामावतार जग्गी की 4 जून 2003 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें से कुछ लोग सरकारी गवाह बन गए थे, जबकि 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी।जग्गी एक कारोबारी पृष्ठभूमि से थे और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी माने जाते थे। जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए, तो जग्गी भी उनके साथ चले गए और उन्हें पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया था। हत्या के समय प्रदेश की राजनीति काफी गरम थी और इसे राजनीतिक साजिश से जोड़कर भी देखा गया था।”

“सतीश जग्गी की ओर से कोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया था कि यह हत्या तत्कालीन राज्य सरकार की प्रायोजित साजिश थी। उनके वकील ने दलील दी थी कि सीबीआई जांच के दौरान कई अहम सबूत मिटा दिए गए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केवल सबूत नहीं, बल्कि साजिश की परतें खोलना ज्यादा जरूरी होता है। यही वजह है कि इस केस को दोबारा खोलने की मांग की गई थी।”

“इस हत्याकांड में कई बड़े नाम सामने आए थे। दोषियों में पुलिस अधिकारी, शूटर और स्थानीय प्रभावशाली लोग शामिल थे। दो तत्कालीन सीएसपी, एक थाना प्रभारी और कई अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। यह मामला शुरू से ही हाई-प्रोफाइल और विवादों से घिरा रहा, जिसकी वजह से इस पर देशभर की नजरें टिकी रहीं।”

“तो करीब 20 साल पुराने इस चर्चित हत्याकांड में अब एक बार फिर न्याय की नई उम्मीद जगी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई शुरू हो चुकी है और 1 अप्रैल को होने वाली फाइनल हियरिंग पर सभी की नजरें टिकी हैं। अब देखना होगा कि क्या इस केस में कोई नया मोड़ आता है या पहले के फैसले बरकरार रहते हैं। फिलहाल के लिए इतना ही, बने रहिए निशानेबाज न्यूज के साथ।”

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