Friday, August 21, 2026
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फ्रीबीज पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोले CJI – घाटे में राज्य फिर भी मुफ्त योजनाएं जारी

Supreme Court
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निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त सुविधाओं यानी फ्रीबीज की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने कहा कि कई राज्य पहले से ही राजस्व घाटे में चल रहे हैं, इसके बावजूद मुफ्त योजनाओं का वितरण जारी है, जो देश की आर्थिक विकास प्रक्रिया के लिए खतरनाक हो सकता है।

सुनवाई के दौरान उठे अहम सवाल

तमिलनाडु विद्युत वितरण निगम बनाम केंद्र सरकार मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह टिप्पणी की।
CJI ने कहा कि राज्य सरकारें मुफ्त भोजन, साइकिल, बिजली और अब सीधे नकद हस्तांतरण जैसी योजनाएं चला रही हैं, जिससे विकास कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि शुरुआत से ही मुफ्त वितरण होगा तो विकास परियोजनाओं के लिए धन कहां से आएगा। कोर्ट ने राज्यों से इस खर्च के स्रोत पर स्पष्ट हलफनामा देने की आवश्यकता भी बताई।

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चुनावी राजनीति और फ्रीबीज संस्कृति

सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि कई बार ऐसी योजनाओं की घोषणा चुनाव से ठीक पहले की जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों और समाज के विभिन्न वर्गों से इस प्रवृत्ति पर पुनर्विचार करने की सलाह दी।

टैक्स और वित्तीय बोझ का मुद्दा

अदालत ने स्पष्ट किया कि मुफ्त योजनाओं में खर्च होने वाला पैसा अंततः जनता के टैक्स से आता है।
कुछ राज्यों में आर्थिक रूप से सक्षम वर्गों को भी मुफ्त बिजली जैसी सुविधाएं दिए जाने पर कोर्ट ने सवाल उठाए और इसे वित्तीय अनुशासन के विपरीत बताया।

आर्थिक प्रभाव पर बढ़ी चिंता

सुप्रीम कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी ने एक बार फिर देश में फ्रीबीज संस्कृति बनाम आर्थिक स्थिरता की बहस को तेज कर दिया है। अदालत ने संकेत दिया कि दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय जिम्मेदारी जरूरी है।

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