Saturday, August 15, 2026
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Vikramotsav 2026 Ujjain : देश का सबसे बड़ा सम्मान ‘विक्रमादित्य अलंकरण’: विजेता को मिलेगी 1 करोड़ 1 लाख रुपये की राशि

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Vikramotsav 2026 Ujjain : भोपाल/उज्जैन : धर्म और न्याय की नगरी उज्जैन एक बार फिर वैश्विक स्तर पर अपनी सांस्कृतिक उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार है। आगामी 12 फरवरी से 30 जून तक चलने वाले 139 दिवसीय ‘विक्रमोत्सव 2026’ की रूपरेखा संस्कृति विभाग ने जारी कर दी है। इस बार का उत्सव गायन-वादन के साथ-साथ जल संरक्षण और भारतीय ज्ञान परंपरा का अनूठा दस्तावेज बनेगा।

15 फरवरी को सुरों से होगी महादेव की आराधना

विक्रम शोध पीठ के सचिव श्री राम तिवारी और अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि उत्सव का औपचारिक भव्य शुभारंभ 15 फरवरी को होगा।

  • प्रमुख कलाकार: सुप्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम ‘शिवोहं’ कार्यक्रम के माध्यम से भगवान महाकाल की स्तुति करेंगे।

  • युवा प्रस्तुति: लोकप्रिय गायक विशाल मिश्रा भी अपनी गायकी से श्रद्धालुओं और युवाओं को मंत्रमुग्ध करेंगे।

देश का सबसे बड़ा सम्मान: 1 करोड़ 1 लाख की राशि

इस वर्ष विक्रमोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण ‘सम्राट विक्रमादित्य अंतरराष्ट्रीय अलंकरण’ होगा। यह भारत के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक बनने जा रहा है, जिसकी पुरस्कार राशि 1 करोड़ 1 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसके साथ ही विभिन्न श्रेणियों में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे।

अध्यात्म के साथ आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों का मेल

उज्जैन का दशहरा मैदान इस दौरान ‘महाकाल वन मेले’ का गवाह बनेगा, जहाँ:

  • आयुर्वेद का संगम: आयुर्वेदिक उत्पादों के स्टॉल लगाए जाएंगे।

  • स्वास्थ्य सेवा: आम जनता के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध होगी।

  • थीम: यह पूरा उत्सव भारतीय ज्ञान परंपरा और जल संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम बनेगा।

अधिकारियों का पक्ष

“विक्रमोत्सव 2026 केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय गौरव को पुनर्जीवित करने का संकल्प है। 139 दिनों तक चलने वाला यह कार्यक्रम अपनी भव्यता और विविधता में ऐतिहासिक होगा।” — शिवशेखर शुक्ला, अपर मुख्य सचिव, संस्कृति विभाग

उज्जैन प्रशासन और संस्कृति विभाग इस महाकुंभ की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, ताकि देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालु सम्राट विक्रमादित्य के वैभव और महाकाल की महिमा का अनुभव कर सकें।

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