Monday, August 24, 2026
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Tariff War : फिर जीता भारत! व्यापार समझौतों में अमेरिका को पटका, ट्रंप फिर हुए फेल

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : दुनिया के बदलते व्यापारिक परिदृश्य में भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हालिया आंकड़ों और विश्लेषणों के अनुसार, वैश्विक व्यापार समझौतों के मामले में भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। वेदा पार्टनर्स की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका की आक्रामक टैरिफ नीति अपेक्षित नतीजे देने में असफल रही है, जबकि भारत ने रणनीतिक और संतुलित दृष्टिकोण से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है।

ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति क्यों रही नाकाम

वेदा पार्टनर्स की को-फाउंडर हेनरीटा ट्रेज के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा अपनाई गई टैरिफ-आधारित रणनीति ने न तो बड़े व्यापारिक समझौते सुनिश्चित किए और न ही वैश्विक भागीदारों पर प्रभाव डाला। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने बीते एक वर्ष में अमेरिका की तुलना में सौ फीसदी से अधिक व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। यही वजह है कि वॉशिंगटन में भारत की बढ़ती भूमिका को लेकर चिंता गहराती जा रही है।

बड़े वादे, कमजोर नतीजे

ट्रंप सरकार ने 90 दिनों में 90 व्यापार समझौते करने का दावा किया था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आती है। पिछले दस महीनों में अमेरिका केवल कंबोडिया और मलेशिया के साथ ही दो सीमित व्यापारिक डील कर पाया है। अमेरिकी सांसदों और नीति-निर्माताओं में इस बात को लेकर असंतोष बढ़ रहा है कि आक्रामक बयानबाजी को ठोस आर्थिक नतीजों में नहीं बदला जा सका।

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दक्षिण कोरिया और अन्य साझेदारों से बढ़ी दूरी

दक्षिण कोरिया के साथ प्रस्तावित अहम व्यापार समझौता भी अब तक आगे नहीं बढ़ पाया है। कभी 96 फीसदी व्यापार मुक्त व्यापार समझौते के तहत कवर करने वाले संबंध अब टैरिफ दबाव की वजह से कमजोर हो गए हैं। यही स्थिति यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े साझेदारों के साथ भी देखने को मिल रही है, जहां अमेरिका की दबाव नीति असर नहीं दिखा पा रही।

घरेलू विरोध ने बढ़ाई मुश्किलें

अमेरिका के भीतर भी टैरिफ नीति का कड़ा विरोध सामने आ रहा है। सर्वे के अनुसार, करीब 50 फीसदी अमेरिकी नागरिक चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट इन टैरिफ उपायों को खत्म करे। इस जनविरोध ने सरकार की आर्थिक विश्वसनीयता को कमजोर किया है और नए व्यापार समझौतों की राह और कठिन बना दी है।

राजनीतिक असर और आगे की राह

व्यापारिक मोर्चे पर सुस्ती का सीधा असर राष्ट्रपति ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी की लोकप्रियता पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका अपनी ट्रेड पॉलिसी में बदलाव नहीं करता, तो वैश्विक मंच पर उसकी आर्थिक साख को और नुकसान हो सकता है। वहीं, भारत संतुलित कूटनीति और सक्रिय व्यापार समझौतों के जरिए खुद को एक मजबूत वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करता जा रहा है।

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