C.G News : छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का रिकॉर्ड! कोरिया में धान खरीदी में रफ्तार, लेकिन मिलों में करोड़ों की हेराफेरी

Rahul Goshwami
धान खरीदी में रफ्तार, लेकिन मिलों में बड़ी गड़बड़ी से प्रशासन की तैयारियों पर सवाल

कोरिया: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा धान खरीदी को सुचारू और पारदर्शी बनाने के दावे के बीच कोरिया जिले से इस बार दो तरह की तस्वीरें सामने आई हैं—एक मीठी, दूसरी कड़वी।मीठी इसलिए कि जिले में इस बार धान खरीदी रिकॉर्ड रफ्तार पकड़ चुकी है, और किसान भुगतान को लेकर राहत महसूस कर रहे हैं।कड़वी इसलिए कि कुछ राइस मिलों में मिली बड़ी गड़बड़ी ने सरकारी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

धान खरीदी में रिकॉर्ड प्रगति
जिले में अब तक 20,306 किसानों से 1,28,475.12 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है, जो पिछले साल की तुलना में बेहतर है।सरकार इसे अपनी उपलब्धि बता सकती है क्योंकि किसानों को 295 करोड़ 49 लाख रुपए से अधिक का भुगतान समय पर कर दिया गया है।कृषि ऋण वसूली भी सरकार के लिए सकारात्मक संकेत है—48 करोड़ 80 लाख रुपए की वसूली हो चुकी है।

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धान उठाव अच्छा लेकिन…
जिले के 21 उपार्जन केंद्रों में काम तेजी से चल रहा है और धान उठाव 75% से ज्यादा पूरा हो चुका है।यह प्रशासन के लिए एक मजबूत पक्ष है, लेकिन इसी बीच राइस मिलों की गड़बड़ी ने सरकार की कमान पर चोट की है।

राइस मिलों में करोड़ों की गड़बड़ी, सरकारी निगरानी पर बड़ा सवाल
जांच में 1,326.60 क्विंटल अवैध चावल बरामद होना सरकार और प्रशासन दोनों के लिए करारा झटका है।यह चावल कथित तौर पर बिहार से अवैध रूप से लाया गया था, जबकि बिल–व्हाउचर में उसे “तौल के लिए आया माल” बताया जा रहा था।

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उधर, मिल में सिर्फ 12,000 क्विंटल धान पाया गया, जबकि एफसीआई-नान के लिए लगभग 18,000 क्विंटल चावल जमा होना चाहिए था।ऐसे में उठता सवाल यह है कि सिस्टम की निगरानी कहाँ कमजोर पड़ी?सरकार के सख्त दावों के बावजूद मिलों में पुराने और नए चावल की ऐसे गड़बड़ियां कैसे नजरअंदाज हो गईं?

कलेक्टर की कार्रवाई से दिखी तत्परता—लेकिन रोकथाम कहाँ थी?
कलेक्टर चंदन त्रिपाठी ने रजौली केंद्र का औचक निरीक्षण कर अमानक धान की पहचान की, बारदाना जांचा और तत्काल रिजेक्शन कराया।यह कार्रवाई दिखाती है कि अधिकारियों की जमीन पर पकड़ है।लेकिन यह सवाल भी उठता है कि अगर प्रणाली इतनी सतर्क है, तो मिल मालिक इतने बड़े स्तर पर चावल की हेराफेरी कैसे कर पाए? ऐसे में सरकार के लिए यह “कड़वा” संकेत है कि सिस्टम में निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत है।

धान खरीदी प्रक्रिया जारी,सरकार दावा कर रही है पारदर्शिता का
राज्य में धान खरीदी 15 नवंबर से 31 जनवरी 2026 तक चलेगी।सरकार ने प्रति एकड़ 21 क्विंटल और प्रति क्विंटल 3,100 रुपए की दर तय की है।किसानों को भुगतान समय पर मिल रहा है—ये सरकार के लिए सकारात्मक पक्ष है।लेकिन अवैध चावल की भारी बरामदगी और मिलों की गड़बड़ी यह बताती है कि धान खरीदी व्यवस्था को अभी भी और सख्ती और पारदर्शिता की जरूरत है।

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