balod News: के पी चंद्राकर /बालोद : छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी मिशन वात्सल्य योजना, जिसका उद्देश्य बच्चों का संरक्षण और उनके भविष्य को सुरक्षित करना है, बालोद जिले में विवादों में घिरती जा रही है। आरोप है कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने संविदा भर्ती प्रक्रिया में शासन के नियमों को दरकिनार कर अपने पसंदीदा लोगों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की है। भर्ती के लिए जारी पात्र और अपात्र सूची में बार-बार बदलाव कर विभागीय अधिकारियों ने पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
balod News: वर्ष 2024 में बाल संरक्षण इकाई और चाइल्ड हेल्पलाइन के कुल सोलह रिक्त पदों पर आवेदन आमंत्रित किए गए थे। शासन की भर्ती नियमावली के अनुसार इन पदों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता, आवश्यक अनुभव और महिला एवं बाल विकास या विधि से जुड़े कार्य का प्रमाणपत्र अनिवार्य था। लेकिन आरोप है कि अधिकारियों ने इन मापदंडों को नजरअंदाज कर मनमानी तरीके से सूची तैयार की। विभागीय पसंद के लोगों को पात्र और वास्तविक योग्य अभ्यर्थियों को अपात्र कर दिया गया।
balod News: इस पूरे मामले में विभागीय कर्मचारी योगेश कुमार का नाम प्रमुखता से सामने आया है। योगेश कुमार को पहले उच्च पद के लिए पात्र घोषित किया गया, लेकिन मामला खुलने और विरोध की आशंका के चलते बाद में उन्हें अपात्र कर दिया गया। सूची में बार-बार किए गए इस तरह के बदलाव स्पष्ट करते हैं कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं बल्कि पूरी तरह से दबाव और सिफारिश पर आधारित थी।
balod News: योग्यताओं की अनदेखी भी इस विवाद का अहम हिस्सा है। शासन की नियमावली में स्पष्ट उल्लेख है कि महिला एवं बाल विकास, एनजीओ या विधिक सहायता से जुड़े कार्यों का अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को अनुभव अंक दिए जाने चाहिए। लेकिन विभाग ने इस नियम को नजरअंदाज कर केवल शासकीय विभागों में कार्यरत लोगों के अनुभव को मान्य माना। इससे वर्षों तक सामाजिक संगठनों में कार्यरत उम्मीदवारों के साथ अन्याय हुआ और उनका हक छीना गया।
balod News: संविदा पदों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शासन का निर्देश है कि संविदा पद अस्थायी होते हैं, लेकिन बालोद जिले में कई कर्मचारी वर्षों से इन पदों पर जमे हुए हैं। आयु सीमा पार कर चुके लोगों की सेवा बढ़ाकर नए युवाओं को अवसर से वंचित किया गया है। संविदा पदों को स्थायी समझकर विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से कब्जा जमाना स्पष्ट रूप से नियमों और पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाता है।
balod News: यह विवाद सिर्फ भर्ती तक सीमित नहीं है। पोषण आहार वितरण से लेकर प्रशिक्षण समारोहों तक विभाग पर धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। बार-बार सामने आ रहे इन मामलों ने विभाग की साख को बुरी तरह प्रभावित किया है।
balod News: भ्रष्टाचार और मनमानी के कारण दर्जनों बेरोजगार युवाओं को न केवल रोजगार से वंचित होना पड़ा बल्कि उन्हें आर्थिक और मानसिक आघात भी झेलना पड़ा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि महीनों तक तैयारी करने और प्रमाणपत्र जुटाने के बावजूद उन्हें मौका नहीं मिला क्योंकि विभाग ने नियमों की बजाय अपनी पसंद को प्राथमिकता दी। इससे युवाओं में गहरा आक्रोश है और उनका विश्वास शासन की भर्ती प्रक्रिया से उठ रहा है।
balod News: इसी मुद्दे को लेकर हिन्द सेना ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं और सात दिनों का अल्टीमेटम जारी किया है। संगठन ने कहा है कि यदि दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई कर उन्हें निलंबित या सेवा समाप्त नहीं किया गया, तो सैकड़ों बेरोजगार युवक हिन्द सेना के बैनर तले विरोध प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। संगठन ने यह भी साफ कर दिया है कि यह आंदोलन प्रतीकात्मक विरोध से शुरू होकर आगे व्यापक जन आंदोलन का रूप ले सकता है।
balod News: अभ्यर्थियों की मांग है कि भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो, पात्र और अपात्र सूची में की गई हेरफेर की जवाबदेही तय हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और शासन की नियमावली के अनुसार अनुभव अंक दिए जाएं। इसके साथ ही आयु सीमा पार कर चुके संविदा कर्मचारियों की सेवा समाप्त की जाए ताकि युवाओं को न्याय मिल सके।

balod News: बालोद जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल केवल भर्ती तक सीमित नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता को चुनौती दे रहे हैं। मिशन वात्सल्य जैसी योजना, जिसका मकसद बच्चों के अधिकारों और भविष्य की रक्षा करना है, भ्रष्टाचार और पक्षपात की भेंट चढ़ती दिख रही है। यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो न केवल बेरोजगार युवाओं का भविष्य प्रभावित होगा बल्कि बच्चों के हितों से जुड़ी यह योजना भी अविश्वसनीय साबित हो जाएगी।










