कांकेर। Kanker Maoist Conviction: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित कांकेर जिले से माओवादी गतिविधियों और देशविरोधी षड्यंत्र से जुड़े एक सनसनीखेज मामले में न्यायपालिका ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। भानुप्रतापपुर स्थित विशेष राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) अदालत ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए (UAPA) और अन्य गंभीर धाराओं के अंतर्गत सुनवाई पूरी करते हुए तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। विशेष न्यायाधीश दीपक के. गुप्ता की अदालत ने तीनों दोषियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत द्वारा प्रत्येक दोषी पर 3,500 रुपये का अर्थदंड भी रोपित किया गया है। इस महत्वपूर्ण मामले में शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक टी.एस. यादव ने की।
यह पूरा प्रकरण 18 मई 2023 का है, जब कांकेर जिले के संवेदनशील कोयलीबेड़ा थाना क्षेत्र के जंगलों में प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन की संदिग्ध गतिविधियों की पुख्ता सूचना सुरक्षा बलों को प्राप्त हुई थी। इस सूचना के आधार पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कैंप (COB) चिलपरस और ढूंट्टा से सुरक्षा बलों की एक संयुक्त तलाशी टीम को इलाके में रवाना किया गया था। अभियान के दौरान सुरक्षा बल कागबरस, नयापारा और चिलपरस के घने जंगलों से गुजरते हुए केसोकोड़ी क्षेत्र की ओर अग्रसर थे। इसी क्रम में पहाड़ी जंगल के नजदीक कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की हलचल नजर आई। पुलिस बल को देखते ही वे लोग भागने लगे, जिस पर सतर्क जवानों ने तुरंत पूरे इलाके की घेराबंदी कर तीनों संदिग्धों को मौके पर ही दबोच लिया।
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पकड़े गए व्यक्तियों से जब कड़ाई से पूछताछ की गई तो उनकी पहचान पीलूराम आंचला उर्फ सालिक राम, रमेश पुनेम उर्फ बुधरू और पुनऊ राम मंडावी के रूप में हुई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, तलाशी के दौरान उनके पास से वॉकी-टॉकी सेट, माओवादी संगठन की गुप्त चिट्ठियां, प्रतिबंधित नक्सली साहित्य, नकदी, गुलेल, टॉर्च और धारदार चाकू समेत कई अन्य आपत्तिजनक सामग्रियां बरामद की गईं। गिरफ्तारी के वक्त आरोपियों द्वारा सुरक्षा बलों की टीम पर हमला भी किया गया था, जिसमें एक जवान के दाहिने हाथ में चोट आई थी। हालांकि, जवानों ने पूरी सूझबूझ और पेशेवर रुख अपनाते हुए स्थिति को नियंत्रण में लिया और आरोपियों को हिरासत में लेकर सभी सामग्रियां जब्त कर लीं।
घटना के तुरंत बाद कोयलीबेड़ा पुलिस थाने में अपराध क्रमांक 08/2023 दर्ज किया गया था। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149 और 307, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 और 5 तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की धारा 38(2) और 39(2) के तहत विधिवत अपराध पंजीबद्ध किया गया। मामले की विस्तृत विवेचना अंतागढ़ के तत्कालीन एसडीओपी अमर सिदार द्वारा की गई। विवेचना के दौरान घटनास्थल से जुड़े तमाम भौतिक साक्ष्यों, जब्त सामग्रियों और तकनीकी साक्ष्यों को एक-एक कर संकलित किया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया था, जहां लंबी न्यायिक प्रक्रिया और सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूती से अपना पक्ष रखा।
न्यायालय में चली सुनवाई के अंत में अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किए गए अकाट्य दस्तावेजों, फॉरेंसिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी पाया। दोषियों में इमलीपारा कागबरस (थाना कोयलीबेड़ा) निवासी 35 वर्षीय पीलूराम आंचला उर्फ सालिक राम, वड्डे पारा पूसनार (थाना गंगालूर, जिला बीजापुर) निवासी 25 वर्षीय रमेश पुनेम उर्फ बुधरू और बिचपारा गोमे निवासी 22 वर्षीय पुनऊ राम मंडावी शामिल हैं। विशेष न्यायाधीश दीपक के. गुप्ता की अदालत ने तीनों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 3,500 रुपये का जुर्माना लगाते हुए कुल 10,500 रुपये का अर्थदंड वसूले जाने का आदेश दिया। इस ऐतिहासिक निर्णय से वर्ष 2023 के इस गंभीर नक्सल मामले में कानून का शिकंजा कस गया है।