Diwali 2026: दिवाली पर मिठाइयों और ड्राई फ्रूट्स के गिफ्ट देने की परंपरा है, लेकिन इस बार त्योहार की खरीदारी जेब पर भारी पड़ सकती है। आयात की लागत बढ़ने से कुछ ड्राई फ्रूट्स महंगे हो गए हैं। खासकर किशमिश और खजूर के आयात भाव में 20 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, इस साल त्योहारी सीजन में ड्राई फ्रूट्स की कुल कीमतों में करीब 2 फीसदी का इजाफा हुआ है। ऐसे में गिफ्ट पैक और घर की खरीदारी का बजट बढ़ सकता है।
ऐसे में अगर आप भी त्योहार पर अपनों को कुछ खास देना चाहते हैं, लेकिन ज्यादा खर्च नहीं करना चाहते, तो कुछ दूसरे विकल्प चुन सकते हैं। जरूरी नहीं कि गिफ्ट महंगा ही हो, सही पसंद और अच्छी पैकिंग के साथ छोटी-सी चीज भी खास बन सकती है।
मिठाई और चॉकलेट के गिफ्ट बॉक्स
ड्राई फ्रूट्स की जगह मिठाई या चॉकलेट का छोटा गिफ्ट बॉक्स अच्छा विकल्प हो सकता है। बाजार में अलग-अलग बजट में मिठाई और चॉकलेट के पैक मिल जाते हैं। चाहें तो घर पर बेसन के लड्डू, नारियल के लड्डू या चॉकलेट बाइट्स बनाकर सुंदर डिब्बे में पैक कर सकते हैं। इससे गिफ्ट में अपनापन भी रहेगा और खर्च भी कम हो सकता है।
दीये और कैंडल्स
दिवाली रोशनी का त्योहार है, इसलिए दीये और खुशबूदार कैंडल्स भी गिफ्ट के लिए अच्छे विकल्प हैं। मिट्टी के रंगीन दीये, छोटी एलईडी लाइट्स या डेकोरेटिव कैंडल्स का सेट कम बजट में तैयार किया जा सकता है।
छोटे पौधे भी बन सकते हैं अच्छा गिफ्ट
अगर आप कुछ ऐसा देना चाहते हैं जो त्योहार के बाद भी काम आए, तो छोटे इनडोर पौधे चुन सकते हैं। मनी प्लांट, स्नेक प्लांट या तुलसी का छोटा पौधा सजावटी गमले के साथ दिया जा सकता है। यह गिफ्ट घर की सजावट में भी काम आएगा और लंबे समय तक याद रहेगा।
पूजा की थाली और घर सजाने का सामान
दिवाली पर पूजा से जुड़ी चीजें भी गिफ्ट की जा सकती हैं। छोटी पूजा थाली, रोली-अक्षत का सेट, सुंदर घंटी या लक्ष्मी-गणेश की छोटी मूर्ति बजट के अनुसार चुनी जा सकती है। इसके अलावा रंगोली के रंग, तोरण और छोटी सजावटी लाइट्स भी उपयोगी गिफ्ट हो सकते हैं।
ड्राई फ्रूट्स ही देने हैं तो अपनाएं यह तरीका
अगर आप ड्राई फ्रूट्स का गिफ्ट देना चाहते हैं, तो बड़े डिब्बे के बजाय छोटा पैक चुनें। बादाम, काजू, किशमिश और खजूर को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मिलाकर खुद भी गिफ्ट बॉक्स तैयार कर सकते हैं। सुंदर पैकिंग के साथ छोटा गिफ्ट भी आकर्षक लग सकता है। इस तरह त्योहार की परंपरा भी बनी रहेगी और खर्च को भी संभालना आसान होगा।