Karwa Chauth 2026: करवा चौथ का व्रत इस साल 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला उपवास करती हैं। व्रत शुरू होने से पहले सूर्योदय से पहले सरगी खाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में इसे आशीर्वाद और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। वहीं, पौष्टिक चीजें खाने से व्रत के दौरान ऊर्जा बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
सरगी की परंपरा का क्या है महत्व?
सरगी को करवा चौथ की शुरुआती रस्म माना जाता है। परंपरा के अनुसार, सास अपनी बहू को सरगी देकर उसके सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। इसमें फल, मेवे, मिठाई और दूसरी खाने की चीजें के साथ श्रृंगार का सामान भी शामिल होता है। हालांकि, सरगी देने और उसमें शामिल सामग्री की परंपरा अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकती है।
सरगी की थाली में रखें ये चीजें
सरगी में ऐसी चीजें शामिल करना बेहतर होता है, जो पेट भरने के साथ शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी दें। थाली में दूध, फेनी या सेवइयां, केला, सेब और अनार जैसे फल रख सकती हैं। इसके अलावा बादाम, काजू, अखरोट और किशमिश जैसे मेवे भी शामिल किए जा सकते हैं।
कुछ परिवारों में सरगी के साथ परांठा, मट्ठी, खीर या मिठाई खाने की परंपरा है। बहुत ज्यादा मीठा या तला हुआ भोजन खाने के बजाय संतुलित मात्रा में फल, मेवे और पेट भरने वाला खाना लेना उपयोगी हो सकता है।
सरगी खाने का सही समय क्या है?
सरगी सूर्योदय से पहले खाई जाती है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने क्षेत्र में सूर्योदय का समय देखकर उसी के अनुसार तैयारी करनी चाहिए। कोशिश करें कि जल्दबाजी में खाने के बजाय आराम से भोजन करें। पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि इसके बाद कई महिलाएं चंद्र दर्शन तक निर्जला व्रत रखती हैं।
क्या सरगी के बिना रख सकते हैं व्रत?
सरगी की परंपरा महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन इसे लेकर रीति-रिवाज परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकते हैं। यदि किसी कारण सरगी उपलब्ध न हो, तो अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत रखा जा सकता है। निर्जला उपवास सभी के लिए उपयुक्त नहीं होता, खासकर गर्भवती महिलाओं, मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए। ऐसी स्थिति में व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।