Health: टेक नेक और ‘सिटिंग एपिडेमिक’ क्या हैं? जानें क्यों कम उम्र में बढ़ रहा पीठ और गर्दन का दर्द

News Desk

Health: आजकल गर्दन, कंधे और पीठ में दर्द की शिकायत सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। कम उम्र के युवाओं में भी लंबे समय तक बैठने, मोबाइल देखने और गलत पोस्चर में काम करने के कारण ऐसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। घंटों लैपटॉप पर काम करना, पढ़ाई के दौरान लगातार बैठे रहना और खाली समय में फोन पर स्क्रॉल करना शरीर की मांसपेशियों पर असर डालता है। ऐसी आदतों को लंबे समय तक नजरअंदाज करने से दर्द और अकड़न की समस्या बनी रह सकती है।

क्या है टेक नेक सिंड्रोम?

टेक नेक ऐसी स्थिति है, जिसमें मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन देखने के लिए बार-बार गर्दन आगे झुकाने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। लंबे समय तक इसी मुद्रा में रहने से मांसपेशियों में खिंचाव, अकड़न और दर्द हो सकता है।

गर्दन को बहुत ज्यादा झुकाकर फोन देखने पर सिर का प्रभावी भार गर्दन पर बढ़ जाता है। इससे मांसपेशियों को लगातार तनाव झेलना पड़ता है। अगर गलत पोस्चर की आदत बनी रहे, तो गर्दन और कंधों की परेशानी बार-बार उभर सकती है। इसलिए मोबाइल इस्तेमाल करते समय स्क्रीन को आंखों के करीब उचित ऊंचाई पर रखना और गर्दन को लंबे समय तक झुकाए रखने से बचना जरूरी है।

घंटों बैठे रहना भी बन सकता है परेशानी

लगातार कई घंटे कुर्सी पर बैठे रहने और शारीरिक गतिविधि कम होने की आदत को आम बोलचाल में ‘सिटिंग एपिडेमिक’ कहा जाता है। यह कोई अलग बीमारी नहीं, बल्कि लंबे समय तक निष्क्रिय रहने की जीवनशैली से जुड़ी समस्या है। ऑफिस का काम, ऑनलाइन पढ़ाई और मोबाइल इस्तेमाल के कारण कई लोग दिन का बड़ा हिस्सा बैठे हुए बिताते हैं।

गलत तरीके से बैठने पर कमर के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ता है और पीठ में दर्द या जकड़न महसूस हो सकती है। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने की आदत मोटापा और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम से भी जुड़ी है।

नसों पर दबाव पड़ने से दिख सकते हैं ये संकेत

अगर गर्दन या कमर की समस्या बढ़ जाए, तो कुछ मामलों में रीढ़ की हड्डी के बीच मौजूद डिस्क या नसें प्रभावित हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में गर्दन या पीठ के दर्द के साथ हाथ-पैर में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो सकती है। हालांकि, हर तरह का दर्द स्लिप डिस्क या नस दबने का संकेत नहीं होता।

गर्दन और पीठ को स्वस्थ रखने के तरीके

मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल करते समय अपनी गर्दन और पीठ को सहज स्थिति में रखें। स्क्रीन को बहुत नीचे रखने के बजाय आंखों के स्तर के करीब रखें और लंबे समय तक एक ही मुद्रा में न बैठें। हर 30 से 60 मिनट में कुछ देर उठकर चलें और हल्की स्ट्रेचिंग करें। काम करने वाली कुर्सी ऐसी हो, जिसमें पीठ को पर्याप्त सहारा मिले।

नियमित एक्सरसाइज और संतुलित डाइट अपनाएं

रोजाना टहलना, हल्की एक्सरसाइज और मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाली गतिविधियां शरीर को सक्रिय रखने में मदद करती हैं। खाने में फल, हरी सब्जियां, दालें, दूध-दही, मेवे और अन्य पौष्टिक चीजें शामिल करें। विटामिन डी या बी12 की कमी भी कुछ स्थितियों में मांसपेशियों और नसों से जुड़ी समस्याओं में योगदान दे सकती है, लेकिन सप्लीमेंट लेने से पहले जरूरत की जांच और विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

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